मोदी का नेतृत्व और महिला आरक्षण: एक नई राजनीतिक दिशा
मोदी का प्रधानमंत्री पद पर प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके बाद संघ परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बनेगा। यह स्थिति वीपी सिंह के समय की याद दिलाती है, जब उन्होंने भी तिकड़मों के जरिए प्रधानमंत्री पद हासिल किया था। उस समय उन्होंने खुद को एक मसीहा के रूप में प्रस्तुत किया, यह सोचकर कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। लेकिन आज, क्या कोई उनकी राजनीतिक विरासत को याद करता है? न तो कोई राजनीतिक धरोहर है और न ही समाज में उनकी कोई पहचान।
पत्थरों का विकास मॉडल
मोदी ने आधुनिक भारत में एक नए हिंदू राजा की छवि बनाई है, जिसमें उन्होंने देश को पत्थरों में बदलने का प्रयास किया है। उनका विकास मॉडल, जो पत्थरों पर आधारित है, मायावती के लखनऊ विकास से मिलता-जुलता है। मोदी ने अपने नाम से कई इमारतें बनवाई हैं, जो उनके कार्यों का प्रतीक बन गई हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि उन्होंने रामलला को भी पत्थरों के नीचे बैठाया है, जिससे आस्था को दर्शनीयता में बदल दिया गया है।
वीपी सिंह और सामाजिक क्रांति
वीपी सिंह के समय में, सामाजिक क्रांति का एक नया दौर शुरू हुआ था, जिसमें कई प्रमुख नेता शामिल थे। लेकिन आज, न तो जनवादी विचारधारा बची है और न ही मंडलवाद का प्रभाव। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी का संगठन बहुत मजबूत था, जो सत्ता की भूख से दूर था। ज्योति बसु जैसे नेताओं ने भ्रष्टाचार से दूर रहकर शासन किया।
महिला आरक्षण का महत्व
अब राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का नया मोड़ आ रहा है। संघ में कभी भी कोई महिला पदाधिकारी नहीं रही, लेकिन भाजपा में कुछ नाम हैं। मोदी का महिला आरक्षण का प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सोनिया गांधी के सपने को साकार कर सकता है। यह एक ऐसा क्षण है, जैसा वीपी सिंह के मंडल आरक्षण के समय था। भविष्य में, महिला आरक्षण के बाद भाजपा का पतन निश्चित है।
