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यूरोपीय संघ: इतिहास और विकास की यात्रा

यूरोपीय संघ की स्थापना और विकास की यात्रा एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, यूरोप ने शांति और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया। रॉबर्ट शूमन के प्रस्ताव से शुरू होकर, यह यात्रा यूरोपीय कोल और स्टील कम्युनिटी से लेकर मास्ट्रिच ट्रीटी और लिस्बन की संधि तक फैली हुई है। जानें कि कैसे ये घटनाएँ यूरोप को एक राजनीतिक और आर्थिक संघ में बदलने में सहायक बनीं।
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यूरोपीय संघ: इतिहास और विकास की यात्रा

यूरोप और यूरोपीय संघ का परिचय

यूरोप और यूरोपीय संघ के बारे में आपने सुना होगा। आइए समझते हैं कि यूरोपीय संघ क्या है और इसकी पृष्ठभूमि क्या है। सरल शब्दों में, यूरोप एक महाद्वीप है जिसमें जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्ज़रलैंड, बेल्जियम जैसे 44 देश शामिल हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, यूरोप को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, जिसमें भविष्य में ऐसे विनाशकारी संघर्षों को रोकने का लक्ष्य था। इसी उद्देश्य के साथ, 9 मई 1950 को फ्रांस के विदेश मंत्री रॉबर्ट शूमन ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने सुझाव दिया कि फ्रांस और पश्चिम जर्मनी अपने कोयला और इस्पात उद्योग को एक साझा प्राधिकरण के तहत लाएं। चूंकि ये संसाधन युद्ध के लिए आवश्यक थे, इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्ध को न केवल अकल्पनीय, बल्कि व्यावहारिक रूप से असंभव बनाना था।


यूरोपीय कोल और स्टील कम्युनिटी

यूरोपीय कोल और स्टील कम्युनिटी

शूमन योजना को 1951 में पेरिस संधि के माध्यम से लागू किया गया, जिससे यूरोपीय कोल और स्टील कम्युनिटी (ईसीएससी) की स्थापना हुई। इस समझौते पर बेल्जियम, फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, इटली, लक्ज़मबर्ग और नीदरलैंड जैसे छह देशों ने हस्ताक्षर किए। इन देशों को सामूहिक रूप से “इनर सिक्स” कहा गया। ईसीएससी को यूरोप में आर्थिक सहयोग और शांति स्थापना की दिशा में पहला ठोस कदम माना जाता है।


ट्रीटी ऑफ रोम और ईसीएससी का विस्तार

ट्रीटी ऑफ रोम और ईसीएससी

ईसीएससी की सफलता के बाद, सदस्य देशों ने सहयोग को अन्य क्षेत्रों में विस्तारित करने का निर्णय लिया। 1957 में रोम की संधियों पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत दो प्रमुख संस्थाएं स्थापित हुईं। पहली, यूरोपीय आर्थिक समुदाय (ईईसी), जिसका उद्देश्य एक सामान्य बाजार बनाना था, जहां वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों की आवाजाही बिना किसी बाधा के हो सके। दूसरी, यूराटम, जिसे परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया। आने वाले दशकों में, ईईसी ने व्यापार बाधाओं को कम करते हुए अपने दायरे का विस्तार किया और नए सदस्य देशों को शामिल किया। 1973 में डेनमार्क, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम इसमें शामिल हुए, जबकि 1981 में ग्रीस और 1986 में स्पेन और पुर्तगाल सदस्य बने। इसी वर्ष सिंगल यूरोपियन एक्ट (1986) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका लक्ष्य 1992 तक एक पूर्ण सिंगल मार्केट स्थापित करना और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक एकीकरण को और मजबूत करना था।


मास्ट्रिच ट्रीटी और यूरोपीय संघ का गठन

मास्ट्रिच ट्रीटी और ईयू का जन्म

1992 में हस्ताक्षरित मास्ट्रिच ट्रीटी (यूरोपीय संघ पर संधि) ने यूरोप की दिशा को बदल दिया। यह केवल एक आर्थिक समझौता नहीं था, बल्कि इसने यूरोप को एक राजनीतिक संघ में बदलने की नींव रखी। इस संधि के बाद, यूरोपीय समुदाय का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से यूरोपीय संघ (ईयू) कर दिया गया। मास्ट्रिच ट्रीटी के तहत एक एकल मुद्रा – यूरो की नींव रखी गई। 1999 में इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में लॉन्च किया गया और 2002 में यह नकद के रूप में लागू हुआ। इससे यूरोप की अर्थव्यवस्था को एक एकीकृत दिशा मिली। इस संधि की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि ईयू नागरिकता थी।


लिस्बन की संधि और वर्तमान स्थिति

लिस्बन की संधि

2000 के दशक में, यूरोपीय संघ (ईयू) ने तेजी से विस्तार किया और 2004 में मुख्यतः मध्य और पूर्वी यूरोप के 10 नए देशों को शामिल किया, जो सोवियत संघ के पतन के बाद संभव हुआ। इस बड़े विस्तार के साथ, ईयू की संस्थाओं और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी दिशा में 2007 में लिस्बन की संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जो 2009 में लागू हुई। इस संधि का उद्देश्य ईयू को अधिक कुशल, लोकतांत्रिक और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत सामूहिक आवाज के रूप में स्थापित करना था। इसके तहत यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष का स्थायी पद बनाया गया और यूरोपीय संसद की शक्तियों को बढ़ाया गया। वर्तमान में, 2020 में यूनाइटेड किंगडम के अलग होने के बाद, ईयू में कुल 27 सदस्य देश हैं और यह एक अद्वितीय आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी के रूप में यूरोप के बड़े हिस्से के शासन को प्रभावित करता है।