योगी आदित्यनाथ और मोदी की बैठक: उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल
मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियाँ एक बार फिर तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान राज्य की विकास योजनाओं, संगठनात्मक ढांचे और 2027 के विधानसभा चुनावों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश में कैबिनेट विस्तार और पार्टी संगठन में बदलाव की अटकलें चल रही थीं।
बैठक का राजनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के बीच हुई यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं ने राज्य सरकार की प्रमुख विकास योजनाओं की समीक्षा की और उनके कार्यान्वयन की स्थिति पर विचार किया। इसके साथ ही, आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद यह संकेत मिले हैं कि केंद्र और राज्य नेतृत्व उत्तर प्रदेश के मामलों में पूरी तरह सक्रिय है।
Chief Minister of Uttar Pradesh, Shri @myogiadityanath, met Prime Minister @narendramodi.@CMOfficeUP pic.twitter.com/N0CuzsTSXo
— PMO India (@PMOIndia) January 5, 2026
कैबिनेट विस्तार की चर्चाएँ
इस मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएँ और भी तेज हो गई हैं। अनुमान है कि मकर संक्रांति के बाद 14 या 15 जनवरी 2026 को मंत्रिपरिषद का विस्तार किया जा सकता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री सहित 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 60 हो सकती है। यह विस्तार 2027 के चुनाव से पहले का अंतिम माना जा रहा है, इसलिए संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया
हाल ही में पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह इस पद के लिए नामांकन करने वाले एकमात्र नेता थे। उनके चयन के बाद संगठन में बदलाव की प्रक्रिया को गति मिली है। माना जा रहा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी संगठन और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी की बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात प्रस्तावित है।
जातीय बैठकों का राजनीतिक प्रभाव
हाल के दिनों में बीजेपी के भीतर विभिन्न सामाजिक समूहों की बैठकों ने भी चर्चा का विषय बना दिया है। ब्राह्मण विधायकों का लखनऊ में सहभोज हो या ठाकुर, लोध और कुर्मी समाज के नेताओं की बैठकें, इन सभी आयोजनों ने राजनीतिक हलचल को बढ़ावा दिया है। हालांकि पार्टी ने इन बैठकों को सामान्य बताया है, लेकिन इनके संकेत कैबिनेट और संगठन में प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखे जा रहे हैं।
भविष्य की रणनीति और नियुक्तियाँ
कैबिनेट विस्तार के साथ ही आयोगों, बोर्डों और परिषदों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना है। 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में संभावित नामों पर चर्चा की जा चुकी है। पार्टी नेतृत्व का ध्यान स्पष्ट है कि 2027 के चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन और मजबूती सुनिश्चित की जाए।
