योगी आदित्यनाथ की दिल्ली यात्रा: भाजपा में संभावित बदलाव की चर्चा
मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण मुलाकात
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में दिल्ली का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और नितिन नबीन से मुलाकात की। मकर संक्रांति से पहले हुई इस बैठक ने राजनीतिक बदलाव की अटकलों को जन्म दिया है। पार्टी के नेता मानते हैं कि भाजपा को उत्तर प्रदेश में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता है।
भाजपा के नेताओं को यह भी पता है कि समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच तालमेल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। विधानसभा चुनाव में अब केवल एक साल का समय बचा है, और अगले साल फरवरी में चुनाव होने वाले हैं। पिछले नौ वर्षों से भाजपा की सरकार है, और योगी आदित्यनाथ इस राज्य के मुख्यमंत्री हैं, जो कि एक रिकॉर्ड है।
हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा में कोई भी मुख्यमंत्री लगातार दो कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। क्या योगी आदित्यनाथ अपने दूसरे कार्यकाल को पूरा कर तीसरे कार्यकाल के लिए भाजपा का नेतृत्व करेंगे? यह आम धारणा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
योगी आदित्यनाथ ने हिंदुत्व की राजनीति और बुलडोजर प्रशासन के माध्यम से जो छवि बनाई है, उसी पर भाजपा को चुनावी लड़ाई लड़नी होगी। लेकिन इस पर मोदी के करिश्मे और अमित शाह के प्रबंधन पर सवाल उठते हैं।
जातीय समीकरण और संभावित बदलाव
दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ के शासन में उनकी राजपूत जाति के लोगों के वर्चस्व के कारण अन्य जातियों में नाराजगी बढ़ रही है। कोडिन कफ सिरप मामले में आरोपों के चलते यह नाराजगी और भी बढ़ी है। आरोपियों को बचाने या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने के कारण भाजपा के कोर समर्थकों में भी असंतोष की खबरें आ रही हैं।
भाजपा ने कुर्मी जाति के पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के दांव को कमजोर करने का प्रयास किया है। फिर भी, कुछ और बड़े बदलावों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। क्या मुख्यमंत्री का पद बदलेगा? यह कहना मुश्किल है, लेकिन सरकार में व्यापक फेरबदल की तैयारी चल रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के संभावित खराब प्रदर्शन के बाद से ही सरकार में बदलाव की चर्चा हो रही है। भाजपा को जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ठीक करने की आवश्यकता है। पिछले डेढ़ साल में, योगी आदित्यनाथ ने कई बार दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात की है, लेकिन फेरबदल की मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। मकर संक्रांति के बाद कुछ निश्चित रूप से होगा।
