योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में बदलाव की अनिश्चितता बनी हुई है
मंत्रिमंडल में बदलाव का सवाल
यह एक ऐसा मुद्दा बन गया है, जिसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिल रहा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से चार साल में मंत्रिमंडल में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ है। हालांकि, कुछ पदों पर नियुक्ति या विभागों में बदलाव होते रहे हैं, लेकिन चार साल तक मंत्रिमंडल में स्थिरता रहना एक असामान्य स्थिति है। इस पर चर्चा इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि हर दो-तीन महीने में मंत्रिमंडल में बदलाव की बातें उठती हैं, लेकिन फिर यह चर्चा ठंडा पड़ जाती है।
हाल ही में ऐसा प्रतीत हुआ कि मंत्रिमंडल का विस्तार निश्चित है। दिल्ली और लखनऊ के बीच गतिविधियाँ तेज हो गई थीं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की स्वीकृति दे दी है। ध्यान देने योग्य है कि अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यदि जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए नए प्रयास किए जाते हैं, तो मंत्रियों को कार्य करने का समय मिलना आवश्यक है। हालांकि, सभी प्रयासों के बावजूद स्थिति में कोई प्रगति नहीं हुई है। हाल ही में मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। अगले हफ्ते तक इस पर कयास लगते रहेंगे।
