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रत्ना देबनाथ की न्याय की लड़ाई: विधायक बनने के बाद भी नहीं थम रही संघर्ष की कहानी

रत्ना देबनाथ, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं, ने हाल ही में विधायक बनने के बाद अपनी कोशिशों को और तेज कर दिया है। उन्होंने अदालत में तीन लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने दुश्मन के रूप में देखा है। रत्ना ने कसम खाई है कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलता, वह अपने बालों में कंघी नहीं करेंगी। जानें इस संघर्ष की पूरी कहानी और रत्ना के राजनीतिक सफर के बारे में।
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रत्ना देबनाथ की न्याय की लड़ाई: विधायक बनने के बाद भी नहीं थम रही संघर्ष की कहानी

कोलकाता में न्याय की खोज


कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के मामले में पीड़िता की मां, रत्ना देबनाथ, अब भी न्याय की खोज में जुटी हुई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने का संकल्प नहीं छोड़ा है। रत्ना ने पहले ही कसम खाई थी कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, वह अपने बालों में कंघी नहीं करेंगी। अब विधायक बनने के बाद, उन्होंने इस लड़ाई को और तेज कर दिया है और अदालत में तीन लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। इस मामले में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताया है।


इंसाफ की लड़ाई जारी

गुरुवार को रत्ना देबनाथ ने कहा, "मैंने कल अपनी शपथ ली है। आज मुझे कुछ दस्तावेज जमा करने थे। मैं यहां वही करने आई हूं। सब कुछ ठीक है। मेरी बेटी इस लड़ाई में हमेशा मेरे साथ है। मैं उसके बिना कुछ नहीं कर सकती।" तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के बारे में उन्होंने कहा, "मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगी। अगर वह चाहें, तो कोर्ट जा सकती हैं।"


कंघी नहीं करने की कसम

रत्ना देबनाथ ने 9 अप्रैल को कसम खाई थी कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलता, वह अपने बालों में कंघी नहीं करेंगी। उन्होंने कहा, "मेरी सबसे बड़ी दुश्मन ममता बनर्जी हैं क्योंकि वह स्वास्थ्य मंत्री हैं और मेरी बेटी स्वास्थ्य विभाग में काम करती थी। ममता बनर्जी ने मेरी बेटी को क्यों नहीं बचाया?" उन्होंने यह भी कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वह अपने बालों में कंघी नहीं करेंगी।


लाठीचार्ज से विधानसभा तक का सफर

बुधवार को विधानसभा परिसर में बातचीत के दौरान, देबनाथ ने बताया कि उनकी लड़ाई का सबसे भावुक पल तब आया, जब वह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में शामिल हुईं। उन्होंने कहा, "मुझे पिछले साल अगस्त का वह समय याद आ गया, जब मैंने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 'नबन्ना अभियान' में हिस्सा लेते हुए पुलिस लाठीचार्ज का सामना किया था।" इस बार, कोलकाता पुलिस के कर्मी उनके साथ सेल्फी लेना चाहते थे और उन्हें अंदर तक ले गए।


सियालदाह कोर्ट में नई याचिका

पीड़िता के माता-पिता ने सियालदाह कोर्ट में नया आवेदन दायर किया है, जिसमें पूर्व विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दास और टीएमसी पदाधिकारी संजीव मुखोपाध्याय के नाम शामिल हैं। याचिका में मांग की गई है कि इन लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में पूछताछ की जाए। आरोप है कि इन तीनों ने पीड़िता के जल्दबाजी में दाह संस्कार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


शव को अस्पताल से निकालने का आरोप

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि तीनों लोगों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से शव को बाहर निकालकर अंतिम संस्कार कराया। याचिका में यह भी कहा गया है कि दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने की कोशिश को भी रोका गया और दाह संस्कार से पहले जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे।


पनीहाटी सीट पर बड़ी जीत

4 मई को घोषित चुनाव परिणामों में, रत्ना देबनाथ ने पनीहाटी विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस को बड़े अंतर से हराया। उन्हें कुल 87,977 वोट मिले, जबकि टीएमसी उम्मीदवार तीर्थांकर घोष को 59,141 वोट हासिल हुए। इस सीट पर लेफ्ट उम्मीदवार कलातन दासगुप्ता तीसरे और सुभाष भट्टाचार्य चौथे स्थान पर रहे।