राघव चड्ढा की भाजपा में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स में भारी गिरावट
सोशल मीडिया पर राघव चड्ढा की लोकप्रियता में कमी
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सोशल मीडिया पर लोकप्रियता को एक बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या में 24 घंटे के भीतर लगभग 10 लाख की कमी आई है। यह घटना विशेष रूप से युवाओं और जनरेशन Z के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
राघव चड्ढा ने हाल ही में AAP से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। उनके साथ पार्टी के छह अन्य राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की खबर ने दिल्ली की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। यह निर्णय पहले से ही चर्चा में था, खासकर जब उन्हें कुछ हफ्ते पहले राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटा दिया गया था।
BREAKING : Raghav Chadha has lost more than 1.1M followers in less than 24 hours of joining BJP.
— Roshan Rai (@RoshanKrRaii) April 25, 2026
Mood of the nation, he is being abused left and right. pic.twitter.com/ybhDr8trpQ
फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट
पहले कितने थे फॉलोअर्स?
सोशल मीडिया के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। शनिवार दोपहर तक यह संख्या घटकर 13.5 मिलियन रह गई। इस प्रकार, एक दिन के भीतर लगभग 10 लाख लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं, विशेषकर जनरेशन Z ने इस बदलाव पर नाराजगी व्यक्त की है।
NCP (SP) के प्रवक्ता की टिप्पणी
NCP (SP) के प्रवक्ता ने क्या कहा?
NCP (SP) के प्रवक्ता अनिश गावंडे ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि एक वायरल जनरेशन Z 'अनफॉलो' अभियान ने राघव चड्ढा की डिजिटल लोकप्रियता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। सोशल मीडिया पर #UnfollowRaghavChadha तेजी से ट्रेंड करने लगा। कई यूजर्स ने पुराने वीडियो और पोस्ट साझा किए, जिनमें राघव चड्ढा भाजपा और प्रधानमंत्री की आलोचना करते नजर आ रहे थे।
राघव चड्ढा की पहचान
राघव चड्ढा ने कैसे बनाई अलग पहचान?
राघव चड्ढा ने युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने संसद में पितृत्व अवकाश, ट्रैफिक समस्या, महंगे एयरपोर्ट समोसे, टेलीकॉम डेटा लिमिट और गिग वर्कर्स के शोषण जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने Blinkit डिलीवरी पार्टनर के रूप में एक दिन काम भी किया ताकि डिलीवरी कर्मचारियों की समस्याओं को समझ सकें।
इन मुद्दों ने उन्हें युवाओं के बीच एक अलग और आधुनिक नेता की छवि दी थी। कई लोग उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग मानते थे। हाल ही में सोशल मीडिया पर यह भी सुझाव आया था कि उन्हें अपनी जनरेशन Z पार्टी बनानी चाहिए।
हालांकि, भाजपा में शामिल होने के बाद उनके समर्थन आधार में बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई युवा समर्थकों ने खुलकर निराशा व्यक्त की है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पुराने भाजपा विरोधी पोस्ट भी हटा दिए हैं।
