राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उठाया मोबाइल डेटा प्लान्स का मुद्दा, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग
मोबाइल डेटा प्लान्स पर राघव चड्ढा का बयान
राज्यसभा में राघव चड्ढा ने मोबाइल डेटा योजनाओं से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जिसमें उन्होंने कहा कि देश के लाखों उपभोक्ता प्रतिदिन अनजाने में आर्थिक नुकसान का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि टेलीकॉम कंपनियों की वर्तमान प्रणाली उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान नहीं करती। इससे पहले भी, उन्होंने संसद में रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल बंद होने और 28 दिन वाले प्लान्स पर सवाल उठाए थे।
'डेली डेटा लिमिट' की समस्या
इस बार उन्होंने विशेष रूप से 'डेली डेटा लिमिट' की समस्या को उजागर किया। उन्होंने बताया कि जब उपभोक्ता मोबाइल प्लान खरीदते हैं, तो उन्हें प्रतिदिन एक निश्चित मात्रा जैसे 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी डेटा मिलता है। लेकिन यह डेटा हर रात आधी रात को समाप्त हो जाता है। यदि उपभोक्ता उस दिन पूरा डेटा उपयोग नहीं कर पाता, तो बचा हुआ डेटा खत्म हो जाता है और अगले दिन के लिए सुरक्षित नहीं रहता।
उन्होंने इस व्यवस्था को उपभोक्ता हितों के खिलाफ बताते हुए एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 20 लीटर पेट्रोल खरीदता है और उसमें से केवल 15 लीटर का उपयोग करता है, तो बाकी 5 लीटर पेट्रोल वापस नहीं लिया जाता क्योंकि उसका भुगतान पहले ही किया जा चुका होता है। इसी तरह, मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता की संपत्ति होनी चाहिए और इसे बेकार नहीं जाने देना चाहिए।
टेलीकॉम कंपनियों पर आरोप
चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ऐसे प्लान्स को बढ़ावा देती हैं जिनमें रोजाना डेटा लिमिट होती है। इसके विपरीत, मासिक डेटा लिमिट वाले विकल्प कम उपलब्ध होते हैं, क्योंकि इनमें उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार डेटा का उपयोग कर सकते हैं, जिससे कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है।
Telecom companies offer Recharge Plans with ‘𝐃𝐚𝐢𝐥𝐲 𝐃𝐚𝐭𝐚 𝐋𝐢𝐦𝐢𝐭𝐬’ like 1.5GB, 2GB or 3GB per day, resetting every 24 hours. Any Unused Data EXPIRES at midnight, despite being fully paid for.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 23, 2026
𝐘𝐨𝐮 𝐚𝐫𝐞 𝐛𝐢𝐥𝐥𝐞𝐝 𝐟𝐨𝐫 𝟐𝐆𝐁. 𝐘𝐨𝐮 𝐮𝐬𝐞 𝟏.𝟓𝐆𝐁. 𝐓𝐡𝐞… pic.twitter.com/sWiJbKj2AV
इंटरनेट की आवश्यकता और समाधान के सुझाव
अपने भाषण में, चड्ढा ने इंटरनेट को आज के समय की बुनियादी आवश्यकता बताते हुए इसे 'डिजिटल ऑक्सीजन' कहा। उनका कहना था कि शिक्षा, रोजगार, बैंकिंग और संचार जैसे क्षेत्रों में इंटरनेट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में रोजाना बड़ी मात्रा में डेटा का व्यर्थ होना एक गंभीर चिंता का विषय है।
समाधान के लिए दिए तीन सुझाव
इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने तीन प्रमुख सुझाव दिए। पहला, उपभोक्ताओं को डेटा कैरी फॉरवर्ड की सुविधा मिले, ताकि बचा हुआ डेटा अगले दिन उपयोग किया जा सके। दूसरा, महीने के अंत में बचे डेटा की कीमत को अगले रिचार्ज में समायोजित करने का विकल्प दिया जाए। तीसरा, अनयूज्ड डेटा को डिजिटल संपत्ति मानते हुए उसे दूसरों को ट्रांसफर करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की, ताकि उपभोक्ताओं को उनका अधिकार मिल सके।
