राजनाथ सिंह की किरगिस्तान यात्रा: भारत-चीन रक्षा मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किरगिस्तान में एससीओ की बैठक में भाग लिया, जहां उन्होंने चीन के रक्षा मंत्री से मुलाकात की। इस बातचीत में भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति पर चर्चा की गई। राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री से भी मुलाकात की, जिससे भारत-रूस के बीच मजबूत रक्षा सहयोग का संकेत मिलता है। इस बैठक का महत्व वैश्विक तनाव के बीच और भी बढ़ जाता है। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और अधिक जानकारी।
| Apr 28, 2026, 20:23 IST
किरगिस्तान में एससीओ बैठक में भागीदारी
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वर्तमान में किरगिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने चीन के रक्षा मंत्री डोंग जोन से भी मुलाकात की। राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात की जानकारी अपने सोशल मीडिया पर साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा कि बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान एडमिरल जोंग जून के साथ बातचीत करके उन्हें खुशी हुई। हालांकि, इस बातचीत के विषय में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति पर चर्चा हुई है।
भारत-चीन के बीच एलएसी विवाद
भारत और चीन के बीच एलएसी का विवाद काफी पुराना है, लेकिन हाल के वर्षों में यह और बढ़ गया है। कई बार तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। पिछली एससीओ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के बाद, दोनों देशों ने डिसंगेजमेंट का निर्णय लिया था। फिर भी, दोनों पक्षों ने सतर्कता बनाए रखी है। इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है। इसके अलावा, राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री एंड्राई बेलेसफ से भी मुलाकात की, जिसकी जानकारी भी उन्होंने साझा की।
भारत-रूस रक्षा सहयोग
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा से मजबूत रहा है, और इस बैठक में राजनीतिक साझेदारी पर चर्चा की गई। राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात को शानदार बताया, जो यह दर्शाता है कि भारत अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है। बिश्केक में हो रही यह बैठक केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि एक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, विशेषकर पश्चिम एशिया में। ऐसे में एससीओ जैसे मंच पर विभिन्न देशों का एकत्र होना और बातचीत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्री ने भारत की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्ध है और आतंकवाद तथा कट्टरवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है।
