राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के नए चेहरे और दावेदारों की चर्चा
राज्यसभा चुनाव की तैयारी
राज्यसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है, और नामांकन प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी। इस बार 10 राज्यों में 37 सीटों पर चुनाव होंगे, जिनमें से कांग्रेस को पांच सीटें खाली मिलेंगी। अब यह देखना है कि क्या रिटायर हो रहे सांसदों में से कोई फिर से चुना जाएगा या नए चेहरे राज्यसभा में जाएंगे। इस प्रश्न का उत्तर अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन पार्टी के भीतर नए और पुराने नेताओं के बीच खींचतान फिर से शुरू हो गई है।
राहुल गांधी के करीबी सहयोगियों और उनकी टीम के नए नेता राज्यसभा में जाने के लिए तैयार हैं, जबकि पुराने नेताओं को भेजने पर भी चर्चा चल रही है। राहुल की टीम की मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा कृष्णा अल्लावरू, के राजू, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, अलका लांबा, जितेंद्र सिंह, हर्षवर्धन सपकाल और कन्हैया कुमार भी मजबूत दावेदारों में शामिल हैं। इनमें से कुछ लोग मई में होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में भी उच्च सदन में जा सकते हैं।
पुराने नेताओं की दावेदारी
हालांकि, कई पुराने नेता भी राज्यसभा के लिए दावेदार हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी इस सूची में शामिल किया गया है। जबकि राजस्थान में चुनाव नहीं हो रहे हैं, वे फिर भी दावेदार बने हुए हैं। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडे भी राज्यसभा सीट के लिए दावेदार हैं। वे महाराष्ट्र से हैं, जहां कांग्रेस के केवल 16 विधायक हैं, इसलिए वहां से कोई संभावना नहीं है। उत्तर प्रदेश में नवंबर में चुनाव होने हैं, लेकिन वहां कांग्रेस के पास केवल दो विधायक हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी दावेदार हैं। हिमाचल की एक सीट पर इन दोनों के अलावा प्रभारी रजनी पाटिल का नाम भी चर्चा में है। ध्यान रहे कि वे महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यदि कांग्रेस ने किसी बाहरी को टिकट दिया, तो भाजपा उम्मीदवार उतार सकती है।
छत्तीसगढ़ और हरियाणा में दावेदार
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की दो सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन उसे केवल एक सीट मिल पाएगी। उस सीट के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दावेदार हैं। मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद लगाए टीएस सिंहदेव और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज भी इस दौड़ में हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। रिटायर हो रहे केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम में से किसी के वापस जाने की संभावना नहीं है।
हरियाणा में कांग्रेस को एक सीट मिलेगी, लेकिन वहां भी संकट यह है कि यदि उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पसंद का नहीं हुआ या बाहरी हुआ, तो मुश्किलें आ सकती हैं। पहले वहां से अजय माकन और आरके आनंद चुनाव हार चुके हैं। इस पर विचार चल रहा है कि दलित, ब्राह्मण या जाट को भेजा जाए। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र जोर लगा रहे हैं, लेकिन हाल ही में कांग्रेस में वापसी करने वाले अशोक तंवर भी पीछे नहीं हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय हुड्डा पिता-पुत्र को लेना है।
