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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों का बीजेपी में विलय

दिल्ली में राजनीतिक हलचल के बीच, राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव के बाद, AAP के सांसदों की संख्या घटकर तीन रह गई है, जबकि बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इस निर्णय के पीछे सांसदों का आरोप है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों का बीजेपी में विलय

दिल्ली में राजनीतिक हलचल

दिल्ली: राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने 27 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विलय को मान्यता दी। इस निर्णय के बाद, अरविंद केजरीवाल की पार्टी के सांसदों की संख्या घटकर तीन रह गई है, जबकि बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है।


विलय करने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ये सभी सांसद अब बीजेपी के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध हैं। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा के चेयरमैन से अनुरोध किया था कि उन्हें बीजेपी का सांसद माना जाए, जिसे स्वीकार कर लिया गया।




इससे पहले, आम आदमी पार्टी ने रविवार को राज्यसभा के चेयरमैन के समक्ष एक याचिका प्रस्तुत की थी, जिसमें उन सात सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई थी, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने चेयरमैन को एक याचिका दी है जिसमें इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है।


पिछले शुक्रवार को आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा जब सात राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देकर बीजेपी में विलय का ऐलान किया। उनका आरोप था कि केजरीवाल की पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।


राघव चड्ढा ने कहा कि कुछ लोग उनके निर्णय के पीछे की वजह जानना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने करियर को बनाने के लिए नहीं, बल्कि इसे छोड़कर राजनीति में आए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी अब उन लोगों के हाथ में चली गई है जो अपने स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं।


संजय सिंह ने कहा कि राज्यसभा के चेयरमैन का निर्णय उन सांसदों के बीजेपी में विलय के पत्र पर आधारित है, लेकिन जब चेयरमैन उनके पत्र पर ध्यान देंगे, जिसमें इन सांसदों की सदस्यता निलंबित करने की मांग की गई है, तो उन्हें उम्मीद है कि वह संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सही निर्णय लेंगे।