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राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक पारित, विपक्ष ने किया विरोध

राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया, जिसके बाद विपक्ष ने इसे जल्दीबाजी में पास करने का आरोप लगाया। कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी और अन्य दलों ने विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया। इस विधेयक में सीएपीएफ बलों में ग्रुप-वन अधिकारियों की भर्ती और आईपीएस प्रतिनियुक्ति से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। विपक्ष इसे संवैधानिक रूप से गलत मानता है, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रही है।
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राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक पारित, विपक्ष ने किया विरोध

दिल्ली में विधेयक का पारित होना

दिल्ली: बुधवार को 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया। इसके बाद विपक्ष ने विधेयक को जल्दीबाजी में पास करने का आरोप लगाया। कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, आप, डीएमके जैसे विपक्षी दलों ने विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया। यह विधेयक सीएपीएफ बलों, जैसे बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी में ग्रुप-वन अधिकारियों की भर्ती, सेवा शर्तों, प्रमोशन और आईपीएस प्रतिनियुक्ति से संबंधित है, जो एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।


राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने विधेयक को संवैधानिक रूप से गलत और सीएपीएफ अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने वाला बताया।


आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार जब भी कोई विधेयक लाती है, तो हितधारकों से चर्चा नहीं करती। उन्होंने कहा कि सीएपीएफ के जवान सीमाओं की रक्षा करते हैं, लेकिन सरकार उन्हें शहीद का दर्जा भी नहीं देती। उन्होंने मांग की कि विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए, अन्यथा यह सीएपीएफ कर्मियों के साथ अन्याय होगा।


टीएमसी, डीएमके, आप और आरजेडी के सांसदों ने भी इस विधेयक के खिलाफ वॉकआउट किया। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदन चाहता था कि विधेयक सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए।


भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि यह विधेयक सीएपीएफ बलों को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर विरोध कर रहा है।


सरकार का दावा है कि आईजी रैंक के 50 प्रतिशत, एडीजी के 67 प्रतिशत और डीजी/स्पेशल डीजी के 100 प्रतिशत पद आईपीएस के लिए आरक्षित रहेंगे। इससे केंद्र-राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा। हालांकि, विपक्ष इसे सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले का उल्लंघन मान रहा है।


राज्यसभा में पारित होने के बाद, यह विधेयक अब लोकसभा में जाएगा। सीएपीएफ अधिकारी और पूर्व जवान पहले से ही विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। यह मुद्दा आईपीएस बनाम सीएपीएफ कैडर विवाद को फिर से सियासत में ला दिया है।