राज्यसभा में खड़गे का सरकार पर तीखा हमला, सामाजिक सद्भाव और असमानता के मुद्दे उठाए
राज्यसभा में चर्चा के दौरान खड़गे का बयान
नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विपक्षी शासित राज्यों को राज्यपालों द्वारा परेशान करने का मुद्दा उठाया और अमेरिका के साथ व्यापार संधि पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही, उन्होंने देश में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का आरोप भी लगाया।
खड़गे ने उत्तराखंड में एक मुस्लिम व्यापारी पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा, ‘देश एक खतरनाक दौर से गुजर रहा है। भारत की पहचान विविधता और विचारों की प्रथा रही है। उत्तराखंड में सद्भावना को नष्ट कर दिया गया है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो सुरक्षा कैसे संभव है?’ उन्होंने कहा, ‘आपके पास सहिष्णुता की कमी है। आप केवल वोटों के लिए लड़ाई कर रहे हैं। भाजपा के एक मुख्यमंत्री मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर बयान दे रहे हैं। ये मुख्यमंत्री हमेशा मुसलमानों के खिलाफ बोलते हैं। देश में चयनात्मक लक्षित हमले और बुलडोजर राजनीति का सहारा लिया जा रहा है।’ उन्होंने ईसाई समुदाय पर होने वाले हमलों का भी उल्लेख किया।
खड़गे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री संसद में सवालों का सामना करने से बचते हैं। उन्होंने बताया कि 16वीं और 17वीं लोकसभा में 8,123 सवाल पूछे गए, जिनमें से केवल 13 का उत्तर दिया गया। बाकी सभी सवालों को खारिज कर दिया गया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने के संबंध में अपने सवालों को भी खारिज किए जाने की बात की। खड़गे ने कहा कि गैर-एनडीए राज्यों में राजभवन आरएसएस और बीजेपी के कार्यालयों में तब्दील हो गए हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में राज्यपालों ने भाषण देने से इनकार कर दिया।
असमानता के मुद्दे पर खड़गे ने कहा कि देश के एक प्रतिशत लोगों के पास 40 प्रतिशत संपत्ति है, जबकि 50 प्रतिशत जनसंख्या के पास केवल 15 प्रतिशत संपत्ति है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया, ‘मनरेगा को समाप्त मत करो। नया कानून किसानों, मजदूरों और महिलाओं के खिलाफ है। गांधी के नाम पर काम का अधिकार तो बनाए रखो।’ उन्होंने श्रम कोड पर भी कहा कि पुराने श्रम कानूनों को दोस्तों के लाभ के लिए समाप्त किया गया है और यूनियनों को दबाया गया है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे को भी उठाया।
