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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि संघ के कार्यों में बदलाव संभव है। उन्होंने भारत के ईरान के प्रति रुख का समर्थन किया और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता जताई। बैठक में संघ की गतिविधियों और शाखाओं की संख्या में वृद्धि पर भी चर्चा की गई।
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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा

संघ की बैठक का समापन और प्रस्तावों की मंजूरी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक समाप्त हो गई है। इस बैठक के अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। संघ के कार्यों में अगले वर्ष कुछ परिवर्तन होने की संभावना है। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि संघ के पदाधिकारियों के कार्यभार में कुछ बदलाव किए जाएंगे।


पश्चिम एशिया में भारत का रुख

हरियाणा के समालखा में आयोजित इस बैठक के अंतिम दिन, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत का रुख ईरान के संदर्भ में सही है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच। उन्होंने कहा कि सरकार भारत के हित में सही निर्णय ले रही है। इसके साथ ही, संघ पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों को प्राथमिकता देता है।


बांग्लादेश और नेपाल में राजनीतिक स्थिति

होसबाले ने बांग्लादेश और नेपाल में हाल की राजनीतिक उथलपुथल के बाद नई सरकारों के गठन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता, और उनके भारत के साथ अच्छे संबंध पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता भी व्यक्त की।


संघ की गतिविधियों और रिपोर्ट

संघ ने इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और सुझाव प्रस्तुत किए, जिनमें आरएसएस के दायित्व परिवर्तन का मुद्दा भी शामिल था। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में संघ की गतिविधियों और चुनौतियों का उल्लेख किया गया।


संघ की शाखाओं की संख्या में वृद्धि

रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक वर्ष में देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं स्थापित की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं। पहले दो दिनों में आरएसएस की विचारधारा से जुड़े 32 संगठनों ने सुझाव दिए, जिसमें लगभग डेढ़ हजार पदाधिकारियों ने भाग लिया।