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राहुल गांधी और कांग्रेस का तमिलनाडु में गठबंधन न होने का कारण

तमिलनाडु में कांग्रेस और विजय की पार्टी टीवीके के बीच गठबंधन न होने के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। मणिक्कम टैगोर की टीम ने डीएमके के साथ गठबंधन के खिलाफ रहते हुए टीवीके के साथ चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। जानें इस राजनीतिक स्थिति के पीछे के कारण और खड़गे का स्टालिन के प्रति समर्थन।
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राहुल गांधी और कांग्रेस का तमिलनाडु में गठबंधन न होने का कारण

कांग्रेस और टीवीके का तालमेल न होना

कई समाचार चैनल और पत्रकार राहुल गांधी को जिम्मेदार मानते हैं कि तमिलनाडु में कांग्रेस और विजय की पार्टी टीवीके के बीच गठबंधन नहीं हो सका। असल में, यह तालमेल मल्लिकार्जुन खड़गे के कारण नहीं बन पाया। राहुल की टीम, विशेषकर तमिलनाडु के सांसद मणिक्कम टैगोर, ने शुरू से ही कांग्रेस को अलग रहने की सलाह दी थी। वे डीएमके के साथ गठबंधन के खिलाफ थे और चाहते थे कि कांग्रेस नई पार्टी टीवीके के साथ मिलकर चुनाव लड़े। बताया जा रहा है कि टीवीके ने 75 सीटों का प्रस्ताव रखा था। यदि कांग्रेस 75 सीटों पर चुनाव लड़ती, तो टीवीके की लहर के चलते उसे भी कई सीटें मिल सकती थीं.


टीवीके का वादा और डीएमके की स्थिति

टीवीके ने यह भी आश्वासन दिया था कि वह कांग्रेस को सरकार में शामिल करेगा। दूसरी ओर, डीएमके ने स्पष्ट किया था कि अगली बार सरकार बनने पर कांग्रेस को शामिल नहीं किया जाएगा। मणिक्कम टैगोर ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में बताया कि डीएमके के साथ जाने और टीवीके से गठबंधन न करने का निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष का था। यह भी कहा जा रहा है कि टैगोर के दबाव और राहुल के समर्थन के चलते कांग्रेस को तीन सीटें अधिक मिलीं। हालांकि, पिछली बार 18 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार केवल पांच सीटें ही जीत पाई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि खड़गे ने स्टालिन का साथ इसलिए दिया क्योंकि उन्हें लगता है कि स्टालिन एक भरोसेमंद सहयोगी हैं और हमेशा कांग्रेस के साथ खड़े रहे हैं। वे राहुल को भी प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानते हैं। लेकिन अब कांग्रेस में खड़गे के खिलाफ एक मुहिम शुरू हो गई है।