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राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भाजपा का हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाया है, जिसके जवाब में भाजपा ने उनकी खुद की विदेश यात्राओं का विवरण पेश किया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी की यात्राओं पर करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं और उनकी फंडिंग की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस विवाद में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को जल्द जवाब देने की आवश्यकता है, अन्यथा उनकी छवि को नुकसान हो सकता है।
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राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भाजपा का हमला

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भाजपा की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भारतीयों से अपील करनी चाहिए कि वे विदेश यात्रा न करें, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब मोदी ने कच्चे तेल और गैस की कमी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का जिक्र किया।


भाजपा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का विवरण पेश करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 22 वर्षों में लगभग 54 बार विदेश यात्रा की है। भाजपा के सांसद संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन यात्राओं में इटली, ब्रिटेन, अमेरिका, मालदीव, कतर, मस्कट और ओमान जैसे देशों के दौरे शामिल हैं।


संबित पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की फंडिंग के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने अनुमान लगाया कि 2004 से 2026 के बीच इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए होंगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि हर यात्रा में राहुल के साथ 3 से 4 लोग होते थे।


पात्रा ने आरोप लगाया कि कई बार राहुल गांधी ने सुरक्षा व्यवस्था से बचकर यात्रा की और सरकार से अनुमति नहीं ली। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को किसी विदेशी एजेंसी से फंडिंग मिलती है।


भाजपा नेता ने कुछ विशेष यात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में राहुल गांधी की लंदन और बर्लिन यात्रा पर 1.4 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके अलावा, सितंबर और अक्टूबर 2025 में लैटिन अमेरिका की यात्रा पर 5.5 करोड़ रुपये खर्च हुए।


इन आरोपों के संदर्भ में, संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को बिना किसी देरी के जवाब देना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।



-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक।