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राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा: क्या है इसके पीछे की कहानी?

राहुल गांधी ने नए साल की शुरुआत वियतनाम में एक निजी यात्रा से की है, जबकि कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण अभियानों की घोषणा की है। इस यात्रा के दौरान कोई आधिकारिक बैठक नहीं होगी, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल ने रणथम्भौर में नए साल का जश्न मनाया और जर्मनी की यात्रा के बाद अब वियतनाम गए हैं। बीजेपी ने उनकी विदेश यात्रा पर तंज कसा है। लौटने पर, राहुल गांधी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता बढ़ाने का इरादा रखते हैं। जानें इस यात्रा का राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर होगा।
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राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा: क्या है इसके पीछे की कहानी?

राहुल गांधी का नया साल विदेश में


नई दिल्ली: कांग्रेस के नेता और लोकसभा में विपक्ष के प्रमुख राहुल गांधी ने नए साल की शुरुआत एक निजी विदेश यात्रा से की है। सूत्रों के अनुसार, वह एक जनवरी को वियतनाम के लिए रवाना हुए हैं और वहां लगभग एक सप्ताह बिताएंगे। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा पूरी तरह से व्यक्तिगत है और इसका पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। यात्रा के बाद, राहुल गांधी भारत लौटकर पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेंगे।


कांग्रेस का बयान

कांग्रेस ने बताया निजी दौरा


कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने यह यात्रा नए साल की छुट्टियों के दौरान की है। पार्टी के नेतृत्व का कहना है कि इस दौरान कोई आधिकारिक या राजनीतिक बैठक नहीं होगी। हालांकि, विपक्ष के नेता की विदेश यात्रा पर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं, खासकर जब पार्टी ने कई महत्वपूर्ण अभियानों की घोषणा की है।


रणथम्भौर में नए साल का जश्न

रणथम्भौर में मनाया नया साल


वियतनाम जाने से पहले, राहुल गांधी ने नए साल का जश्न राजस्थान के रणथम्भौर में मनाया। यहां गांधी और वाड्रा परिवार ने एक निजी समारोह में भाग लिया, जो प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस अवसर पर रेहान की मंगेतर अविवा बेग और उनका परिवार भी मौजूद था। पारिवारिक माहौल में हुए इस आयोजन की तस्वीरें भी सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राहुल गांधी ने साल की शुरुआत पूरी तरह से निजी समय के साथ की।


पिछली विदेश यात्रा

जर्मनी यात्रा भी रही चर्चा में


यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी हाल के दिनों में विदेश यात्रा पर गए हैं। इससे पहले, वह संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह में जर्मनी गए थे। उस समय भी उनकी यात्रा पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आई थीं। अब, जब कांग्रेस ने 5 जनवरी से "मनरेगा बचाओ अभियान" शुरू करने की घोषणा की है, राहुल गांधी के वियतनाम दौरे ने विपक्ष को एक और मौका दिया है।


बीजेपी की प्रतिक्रिया

बीजेपी का तंज


राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसा है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश सौभाग्यशाली है कि राहुल गांधी को जर्मनी और वियतनाम की यात्राओं के बीच रणथम्भौर में कुछ समय बिताने का अवसर मिला। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जब देश में महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, तब कांग्रेस नेता का विदेश जाना सवाल खड़े करता है।


राजनीतिक सक्रियता की वापसी

लौटते ही बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता


हालांकि, कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी छुट्टियों से लौटते ही राजनीतिक गतिविधियों में जुट जाएंगे। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, वह "मनरेगा बचाओ अभियान" से जुड़ी रैलियों और जनसभाओं में भाग लेंगे। इसके साथ ही, आने वाले महीनों में होने वाले पांच विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत राहुल गांधी विभिन्न राज्यों का दौरा भी कर सकते हैं।


जनवरी का कार्यक्रम

जनवरी का व्यस्त कार्यक्रम


कांग्रेस नेताओं के अनुसार, जनवरी के तीसरे सप्ताह में राहुल गांधी हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पार्टी के नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में भाग लेंगे। इसके अलावा, महीने के अंत में संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें उनकी सक्रिय भूमिका रहने की उम्मीद है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि निजी यात्रा के बाद राहुल गांधी का राजनीतिक कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है।