रूस और चीन की बैठक: मध्य पूर्व में सक्रियता का संकल्प
बीजिंग में महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली। वर्तमान में, जब पूरी दुनिया ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संवेदनशील संघर्ष-विराम पर नजर गड़ाए हुए है, बीजिंग में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद लावरोव ने स्पष्ट किया कि चीन और रूस को किसी भी स्थिति में पीछे नहीं धकेला जाएगा और वे मध्य पूर्व की घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में संकट को अलग-थलग करने के प्रयासों से सामान्य स्थिति में लौटना संभव नहीं है। यह क्षेत्र एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जिसे सुलझाना अत्यंत कठिन है।
पश्चिम का उपनिवेशवाद
लावरोव ने यह भी कहा कि फ़िलिस्तीन, गाज़ा और वेस्ट बैंक को न तो नजरअंदाज किया जाना चाहिए और न ही उन्हें पृष्ठभूमि में धकेला जाना चाहिए। उन्होंने चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ इस बात की पुष्टि की। लावरोव ने यह भी बताया कि पश्चिमी देश आधुनिक उपनिवेशवाद के माध्यम से अपना वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो दूसरों की कीमत पर फल-फूल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, हम अमेरिका और यूरोप द्वारा अपने वर्चस्व को बनाए रखने के प्रयासों पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि दास व्यापार और उपनिवेशवाद को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, और हमें इन तरीकों का उपयोग जारी रखना चाहिए।
यूरोप में तनाव के नए केंद्र
लावरोव ने यह भी बताया कि यूरोप में नए तनाव के केंद्र उभर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें यूरेशिया पर विशेष ध्यान दिया गया। नाटो की गतिविधियाँ उसके अस्तित्व के नए अर्थ की खोज से जुड़ी हैं, खासकर यूक्रेन को अपने खेमे में शामिल करने के प्रयासों के संदर्भ में। यह यूरोपीय संघ का सैन्यीकरण भी है, जिसे नाटो के भीतर संकट की घटनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह वाशिंगटन और यूरोपीय राजधानियों, विशेष रूप से ब्रसेल्स के बीच मतभेदों के कारण हो रहा है।
