लेबनान में यूएन शांति सैनिकों पर हमले की भारत ने की निंदा
लेबनान में यूएन मिशन पर हमला
लेबनान से एक गंभीर और चिंताजनक समाचार आया है। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान, यूनाइटेड नेशंस के शांति सैनिकों पर हमला हुआ है। भारत ने इस हमले की तीखी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। 29 मार्च को, दक्षिणी लेबनान में यूएन मिशन के तहत तैनात सैनिकों पर एक प्रोजेक्टाइल हमला हुआ, जिसमें एक इंडोनेशियाई सैनिक की जान चली गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हुआ। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि शांति के लिए तैनात सैनिकों को निशाना बनाना एक गंभीर मुद्दा है.
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने इस हमले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे कायराना और अस्वीकार्य करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि वे यूएन शांति सैनिकों पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं और सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। भारत ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की है। इस हमले की निंदा करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेज ने कहा कि यूएन कर्मियों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है। उन्होंने दोषियों को शीघ्र सजा देने की मांग की और सभी पक्षों से हिंसा समाप्त करने की अपील की है.
भारत की भूमिका और योगदान
भारत ने इस अवसर पर अपनी भूमिका को भी याद दिलाया है। भारत उन देशों में से एक है जो सबसे अधिक यूएन पीसकीपर्स भेजता है। वर्तमान में, यूएन फील्ड में लगभग 7500 सैनिक 48 देशों से तैनात हैं, जिनमें से 600 से अधिक भारतीय सैनिक हैं। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक शांति को बनाए रखने में कितना महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारत ने विशेष रूप से यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के प्रस्ताव 2589 का उल्लेख किया, जिसे 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शांति सैनिकों पर हमले करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। भारत के प्रतिनिधि पर्वत नैनी हरीश ने कहा कि शांति सैनिक कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और वे वैश्विक सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण हैं.
