Newzfatafatlogo

श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द: क्या है विवाद की असली वजह?

जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा MBBS पाठ्यक्रम की मान्यता रद्द कर दी गई है। यह निर्णय कॉलेज में शैक्षणिक मानकों की कमी के कारण लिया गया है। हाल ही में 46 मुस्लिम छात्रों के प्रवेश को लेकर विवाद उठने के बाद यह कार्रवाई की गई। हालांकि, पहले से दाखिला ले चुके छात्रों की सीटें सुरक्षित रहेंगी। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया।
 | 
श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द: क्या है विवाद की असली वजह?

जम्मू-कश्मीर में नया विवाद


जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हाल ही में 46 मुस्लिम छात्रों के प्रवेश को लेकर उठे विवाद के कुछ हफ्तों बाद, अब कॉलेज को एक बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 50 सीटों वाले एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी है।


यह निर्णय तब आया है जब कॉलेज पहले से ही प्रवेश विवाद के कारण चर्चा में था। आयोग ने स्पष्ट किया है कि संस्थान न्यूनतम शैक्षणिक और बुनियादी मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, जिससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।


NMC ने MBBS की अनुमति क्यों रद्द की?

NMC द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कॉलेज में:



  • पर्याप्त बुनियादी ढांचा नहीं था,

  • अपर्याप्त नैदानिक सामग्री की कमी थी,

  • योग्य और पूर्णकालिक शिक्षण संकाय की भारी कमी थी,

  • रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या मानकों के अनुरूप नहीं थी।


आयोग के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से इन कमियों के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों की सत्यता की जांच के लिए अचानक भौतिक निरीक्षण किया गया, जिसमें सभी आरोप सही पाए गए।


NMC ने कहा, "टीम द्वारा प्रस्तुत मूल्यांकन रिपोर्ट से यह साबित हुआ कि शिकायतें सही और पुष्ट थीं। पाई गई कमियां गंभीर और महत्वपूर्ण थीं।"


छात्रों की MBBS सीट सुरक्षित

हालांकि, आयोग ने छात्रों को राहत देते हुए यह स्पष्ट किया कि पहले से दाखिला ले चुके छात्रों की MBBS सीट रद्द नहीं की जाएगी। NMC के अनुसार, इन छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों के रूप में समायोजित किया जाएगा, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो।


आदेश में कहा गया है कि इस प्रक्रिया को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य और काउंसलिंग अधिकारियों की होगी, जिन्हें इस निर्णय की औपचारिक सूचना दे दी गई है।


46 मुस्लिम छात्रों के प्रवेश से शुरू हुआ विवाद

कुछ हफ्ते पहले वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के पहले MBBS बैच में 50 में से 46 छात्रों के मुस्लिम होने को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध देखने को मिला था। कुछ हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने यह कहते हुए प्रदर्शन किया था कि कॉलेज का निर्माण और संचालन श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले हिंदू श्रद्धालुओं के दान से हुआ है, इसलिए यहां हिंदू छात्रों के लिए आरक्षण होना चाहिए।


यह मुद्दा जल्द ही सांप्रदायिक रंग ले लिया और राज्यव्यापी बहस का विषय बन गया।


मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का तीखा बयान

इस विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने और वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को बंद करने तक की बात कही थी।


मुख्यमंत्री ने कहा, "बच्चों ने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है। किसी ने उन पर एहसान नहीं किया। अगर आप उन्हें यहां नहीं रखना चाहते, तो उन्हें कहीं और समायोजित कर दीजिए।"


उन्होंने आगे कहा, "हम नहीं चाहते कि बच्चे ऐसी जगह पढ़ें, जहां इतनी राजनीति हो। हमें ऐसे मेडिकल कॉलेज की जरूरत नहीं है।"


आंदोलन और दबाव की राजनीति

पिछले सप्ताह श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने कॉलेज में केवल हिंदू उम्मीदवारों को प्रवेश देने की मांग को लेकर 'सनातन जागरण यात्रा' और हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था। NMC के निरीक्षण के बाद समिति के संयोजक सुखवीर सिंह मनकोटिया ने कहा कि इस दौरे से लोगों में उम्मीद जगी है।


क्या प्रवेश विवाद बना मान्यता रद्द होने की वजह?

हालांकि NMC ने अपने आदेश में प्रवेश विवाद का सीधा जिक्र नहीं किया है, लेकिन जिस समय कॉलेज पर यह कार्रवाई हुई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल आयोग का कहना है कि फैसला सिर्फ शैक्षणिक मानकों की कमी के आधार पर लिया गया है।