संभल में हिंदू जनसंख्या में गिरावट: न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का विश्लेषण
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का निष्कर्ष
1947 में, जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, तब संभल में हिंदुओं की जनसंख्या लगभग 45% थी। लेकिन समय के साथ, दंगों, हिंसा और पलायन के कारण यह संख्या घटकर अब केवल 15% रह गई है। इस दौरान हिंदू जनसंख्या में 30% की कमी आई है। वहीं, मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात बढ़कर 85% तक पहुंच गया है। यह स्थिति चिंताजनक है और सवाल उठता है कि क्या यह केवल प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि का परिणाम है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?
न्यायिक आयोग का गठन
इस मुद्दे की जांच के लिए, पिछले साल नवंबर में हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने एक न्यायिक आयोग का गठन किया। इस आयोग में तीन सदस्य शामिल थे: इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा, रिटायर्ड आईएएस अमित मोहन और रिटायर्ड आईपीएस अरविंद कुमार जैन। आयोग ने 9 महीने की जांच के बाद लगभग 450 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया है और जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा।
शुरुआती रिपोर्ट के निष्कर्ष
24 नवंबर 2024 की हिंसा से जुड़ी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह सामने आया था कि झगड़ा एक धार्मिक स्थल को लेकर शुरू हुआ था। लेकिन हालात तेजी से बिगड़ गए, जिससे बाजार और दुकानें प्रभावित हुईं। न्यायिक आयोग ने अपनी जांच में कहा कि यह हिंसा सुनियोजित तरीके से भड़काई गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बाहरी उपद्रवियों को बुलाया गया था और सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई गई थीं।
1947 से 2024 तक दंगों का इतिहास
आयोग ने यह भी उल्लेख किया है कि 1947 से 2024 के बीच संभल में 15 बड़े दंगे हुए हैं। इनमें से 1978 का दंगा सबसे गंभीर था, जिसके कारण सैकड़ों हिंदुओं ने अपने घर छोड़ दिए थे। इस दंगे ने शहर में सामाजिक और धार्मिक संतुलन को बिगाड़ दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दंगे के बाद से हिंदू पलायन की प्रक्रिया तेज हो गई।
रिपोर्ट का राजनीतिक महत्व
भाजपा नेताओं ने इस रिपोर्ट को अपने तर्कों के समर्थन में पेश किया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे सरकार का राजनीतिक एजेंडा बताया है। रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी, जहां इस पर बहस होगी। यह रिपोर्ट एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि क्या संभल का बदलता चेहरा केवल समय और परिस्थितियों का परिणाम है या इसके पीछे सुनियोजित साजिशें और राजनीतिक चूक हैं।