संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर गरमागरम बहस
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बहस
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक शक्ति को कम करने की कोशिश कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सदन में 850 सीटों का गणित प्रस्तुत किया और कहा कि दक्षिणी राज्यों की चिंताएँ निराधार हैं।
850 सीटों का गणित
अमित शाह ने सदन में बताया कि 850 सीटों का आंकड़ा एक गोल संख्या है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 100 सीटें हैं और 33% महिला आरक्षण लागू किया जाता है, तो 50% सीटें बढ़ाकर कुल 150 कर दी जाएंगी। इसमें से 33% महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और बाकी 100 सीटें सामान्य रहेंगी। इसी तरह, वर्तमान 543 सीटों में 50% की वृद्धि करने पर कुल 816 सीटें होंगी, जिसे गोल संख्या बनाकर 850 कहा जा रहा है।
दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं
शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी में कोई कमी नहीं आएगी। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59, कर्नाटक की 28 से 42, आंध्र प्रदेश की 25 से 38, तेलंगाना की 17 से 26 और केरल की 20 से 30 हो जाएंगी। इस प्रकार, दक्षिणी राज्यों की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी और उनकी प्रतिशत हिस्सेदारी भी बढ़ेगी।
विपक्ष के आरोपों का खंडन
अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे झूठा नैरेटिव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की शक्ति कम होने का डर निराधार है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार जातीय जनगणना कराने के लिए तैयार है। शाह ने कहा कि परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा, जिससे सभी राज्यों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
सत्र का महत्व और भविष्य की संभावनाएँ
यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। यदि ये बिल पास हो जाते हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होंगे और महिला आरक्षण भी लागू होगा। अमित शाह के स्पष्ट आंकड़ों के बावजूद विपक्ष अपना विरोध जारी रखे हुए है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी बहस की संभावना है।
