सत्तापक्ष का प्रदर्शन: विपक्ष की चुनौती और महिला आरक्षण का मुद्दा
विपक्ष की स्थिति और सत्तापक्ष का प्रदर्शन
भारत में आमतौर पर विपक्ष चुनावी हार का रोना रोता है, जबकि सत्तापक्ष अपनी जीत का जश्न मनाता है। विपक्ष चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर पक्षपात के आरोप लगाता है, जबकि सरकार उनका बचाव करती है। विपक्ष धांधली के आरोप लगाता है, जबकि सरकार स्थिति को सामान्य बताती है। लेकिन इस बार देश में एक अनोखी स्थिति देखने को मिल रही है। सत्तापक्ष, भाजपा, प्रदर्शन कर रहा है और विपक्ष को समझ नहीं आ रहा कि उसे क्या करना चाहिए। अब विपक्ष भी प्रदर्शन की योजना बना रहा है, लेकिन सत्तापक्ष ने इस मामले में भी उन्हें पीछे छोड़ दिया है।
भाजपा के नेता और कार्यकर्ता महिला आरक्षण के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह सिलसिला 18 मार्च की रात को संसद परिसर में शुरू हुआ, जब नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का बिल विफल हो गया। इसके तुरंत बाद भाजपा और एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पहले से ही इस स्थिति की तैयारी थी।
भाजपा ने इसके बाद पूरे देश में प्रदर्शन की योजना बनाई। विभिन्न राज्यों में महिलाएं आक्रोश मार्च निकाल रही हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन आक्रोश महिला पदयात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं के अधिकारों में बाधा डाली।
भाजपा शासित राज्यों में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, जिसमें विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया जाएगा। दूसरी ओर, विपक्ष अभी यह समझने में लगा है कि उसे क्या करना चाहिए। हालांकि, भाजपा को अपनी बात आम जनता, खासकर महिलाओं तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। विपक्ष का नैरेटिव मजबूत है, जिसमें वह महिला आरक्षण के पक्ष में है लेकिन परिसीमन के खिलाफ है।
हालांकि, विपक्ष की ओर से चुनावी नैरेटिव बनाने के लिए कोई साझा प्रयास नहीं हो रहा है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन ने अपने-अपने राज्यों में माहौल बनाया है, लेकिन कांग्रेस अभी अपनी योजना बनाने में लगी है। यह हैरान करने वाली बात है कि विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने संविधान संशोधन बिल को विफल कराया, लेकिन भाजपा के नैरेटिव का जवाब देने में असफल रहा है।
