सिक्किम की उद्यमी चिमी ओंगमु भूटिया की प्रेरणादायक कहानी
प्रधानमंत्री मोदी की सराहना
हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में सिक्किम की उद्यमी चिमी ओंगमु भूटिया के कार्यों की प्रशंसा की। चिमी ने 'लैग्स्टल डिजाइन स्टूडियो' की स्थापना की है, जहां वह बांस से पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद तैयार करती हैं। उनकी यह पहल देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। यह कहानी केवल एक व्यवसाय की नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और मेहनत से सफलता की ओर बढ़ने का एक उदाहरण है।
'मेरे रोंगटे खड़े हो गए'
जब चिमी ओंगमु भूटिया को यह पता चला कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में उनका नाम लिया है, तो वह आश्चर्यचकित और भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी स्टार्टअप को इतनी बड़ी पहचान मिलेगी। जब मैंने अपना नाम सुना, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है।" चिमी ने इसे एक ऐसा अवसर बताया जो न केवल उनके लिए, बल्कि अन्य उद्यमियों के लिए भी प्रेरणादायक है।
बांस के माध्यम से सफलता की ओर
चिमी का स्टार्टअप पूरी तरह से बांस पर निर्भर है। सिक्किम और पूर्वोत्तर में बांस की भरपूर उपलब्धता है, लेकिन चिमी ने इसे एक उद्योग में बदल दिया है। उनका स्टूडियो घरेलू सजावट, फर्नीचर और हस्तशिल्प उत्पाद बनाता है। चिमी कहती हैं, "बांस को केवल एक पेड़ के रूप में नहीं देखना चाहिए, यह एक हरा सोना है। यदि इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो गरीब से गरीब परिवार भी आत्मनिर्भर बन सकता है।" हालांकि, वह फंडिंग और बुनियादी ढांचे की कमी को अपनी सबसे बड़ी चुनौती मानती हैं।
नेशनल बांस मिशन का योगदान
चिमी का मानना है कि सरकारी योजनाओं ने उन्हें बहुत सहायता प्रदान की है। विशेष रूप से 2017 में शुरू किया गया नेशनल बांस मिशन उनके व्यवसाय के लिए एक नई दिशा लेकर आया। वह कहती हैं, "मैं उन नीतियों की हमेशा आभारी रहूंगी जिन्होंने बांस उद्योग को बढ़ावा दिया। इन योजनाओं से न केवल मुझे, बल्कि पूर्वोत्तर के हजारों लोगों को रोजगार मिला है।" चिमी बताती हैं कि सरकारी सहायता ने उन्हें कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर मार्केटिंग तक में मदद की।
युवाओं के लिए चिमी का संदेश
चिमी ओंगमु भूटिया की सफलता आठ से दस वर्षों की मेहनत का परिणाम है। वह युवाओं को सलाह देती हैं, "जल्दी सफलता के चक्कर में मत पड़ो। मेहनत करो, धैर्य रखो। जब आपका काम बोलेगा, तो आपको कुछ कहने की आवश्यकता नहीं होगी।" वह बांस को आत्मनिर्भर भारत की ताकत मानती हैं। चिमी कहती हैं, "हम 101 फीसदी आश्वस्त हैं कि इस क्षेत्र में और बड़े अवसर आएंगे।" उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि मेहनत और सही दिशा हो, तो छोटे से राज्य का कोई भी व्यक्ति पूरे देश में अपनी पहचान बना सकता है।
