सीएम रेखा गुप्ता ने केजरीवाल की न्याय व्यवस्था पर उठाए सवालों की आलोचना की
केजरीवाल की मानसिकता पर सवाल
न्याय व्यवस्था पर लगातार प्रश्न उठाना केजरीवाल की मानसिकता: सीएम
अदालत से भागकर सत्याग्रह का दावा करना जनता को गुमराह करने का प्रयास
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हालिया बयानों और हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति को लिखे पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का रवैया ऐसा हो गया है जैसे ‘न खाता न बही, केजरीवाल जो कहे वह सही’ हो।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केजरीवाल का आचरण ऐसा प्रतीत होता है मानो वह स्वयं वकील, गवाह और न्यायाधीश बन बैठे हों। यदि सब कुछ वही तय करेंगे, तो न्याय व्यवस्था की आवश्यकता ही क्या रह जाएगी? उन्होंने कहा कि न्यायिक संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाना और संवैधानिक व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना केजरीवाल की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।
सीएम ने कहा कि अदालत में पेश न होने की बात करना और किसी न्यायाधीश पर सार्वजनिक आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति द्वारा जज या अदालत बदलने की मांग करना पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और भगत सिंह जैसे महान व्यक्तियों की तुलना करना अत्यंत आपत्तिजनक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई निर्दोष है, तो उसे अदालत में अपने पक्ष को साबित करना चाहिए। बाहर बैठकर सत्याग्रह का दावा करना केवल एक ‘घटिया मजाक’ है, जिसे जनता और न्याय व्यवस्था दोनों स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि सच्चाई का सामना अदालत में ही किया जाना चाहिए।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बारे में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रहित में ईमानदार लोग जो देश निर्माण में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग देश के प्रति सम्मान नहीं रखते, उन्हें समाज से अलग किया जाना चाहिए।
विधानसभा में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव
दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को बुलाए जाने वाले विशेष सत्र के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी महिलाएं 33 प्रतिशत आरक्षण की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन विपक्ष ने इसमें निम्नस्तरीय भूमिका निभाई। इस विश्वासघात की निंदा करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
