Newzfatafatlogo

सुखजिंदर रंधावा का पंजाब सरकार पर कर्ज़ के जाल में फंसाने का आरोप

पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा ने राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्ज़ के जाल में पंजाब को फंसा रही है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति गंभीर संकट में पड़ सकती है। रंधावा ने सरकार से मांग की है कि कर्ज़ और वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो पंजाब के लोगों पर कर्ज़ का बोझ और बढ़ेगा। जानें इस मुद्दे पर रंधावा की पूरी बात।
 | 
सुखजिंदर रंधावा का पंजाब सरकार पर कर्ज़ के जाल में फंसाने का आरोप

पंजाब की आर्थिक स्थिति पर चिंता

चंडीगढ़- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार पंजाब को कर्ज़ के जाल में फंसा रही है। केवल तीन महीनों में लगभग 9500 करोड़ रुपये का कर्ज़ जुटाना सरकार की वित्तीय योजना की विफलता को दर्शाता है। अप्रैल में 4000 करोड़, मई में 3000 करोड़ और जून में 2500 करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया जाएगा, जिसमें से पहली किश्त 1500 करोड़ रुपये पहले ही ली जा चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने 2026-27 के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये कर्ज़ लेने की योजना बनाई है।


रंधावा ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो पंजाब आने वाले वर्षों में गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि राज्य के कर्ज़ और वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए, ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब की जनता के भविष्य को अल्पकालिक राजनीति और गैर-जिम्मेदार आर्थिक निर्णयों की बलि नहीं चढ़ने दिया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ, तो इस मुद्दे को अदालत में उठाया जाएगा और संसद में भी लाया जाएगा।


उन्होंने बताया कि पंजाब पहले से ही भारी कर्ज़ के बोझ तले दबा हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य पर कुल कर्ज़ 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। यदि कर्ज़ लेने की यह प्रक्रिया जारी रही, तो यह जल्द ही 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।


रंधावा ने कहा कि पंजाब सरकार हर साल नए कर्ज़ लेकर पुराने कर्ज़ चुकाने की नीति पर चल रही है। नया लोन लेकर इसका बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज़ और ब्याज चुकाने में ही खर्च किया जा रहा है। यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पंजाब के लोगों पर पड़ रहा है।


आज पंजाब के हर व्यक्ति पर औसतन 1.25 लाख रुपये से अधिक का कर्ज़ है और आने वाले समय में यह बोझ और बढ़ेगा। राज्य सरकार का बजट का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की तनख्वाह, पेंशन, बिजली सब्सिडी और पुराने कर्ज़ के ब्याज में चला जाता है। कई रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत से अधिक बजट इन स्थायी खर्चों में ही समाप्त हो जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए बहुत कम पैसा बचता है।


रंधावा ने यह भी कहा कि एफआरबीएम (फिजिकल रिस्पांसेबिल्टी एंड बजट मैनेजमेंट एक्ट) राज्यों को वित्तीय अनुशासन में रखने के लिए बनाया गया है और इसके तहत कर्ज़ लेने की सीमाएं तय हैं। सरकार को इन सीमाओं का ध्यान रखते हुए ही कर्ज़ लेना चाहिए।


उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले कुछ महीनों में लिए गए हजारों करोड़ रुपये के कर्ज़ का उपयोग किस विकास कार्य के लिए किया गया है। यदि यह पैसा केवल सब्सिडी और पुराने कर्ज़ चुकाने में ही खर्च हो रहा है, तो यह राज्य की वित्तीय स्थिति को और गंभीर संकट में डाल देगा।


पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए बड़े-बड़े वादे कर रही है और उन वादों को पूरा करने के लिए लगातार कर्ज़ ले रही है। मुफ्त बिजली और अन्य सब्सिडी योजनाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है।