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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सुखना झील के संरक्षण में बिल्डर माफिया की भूमिका पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की सुखना झील की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने मानव गतिविधियों और अवैध निर्माण को इसके सूखने का मुख्य कारण बताया। मुख्य न्यायाधीश ने बिल्डर माफिया और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत की आलोचना की और कहा कि झील का अस्तित्व संकट में है। सुनवाई के दौरान, अदालत ने उच्च न्यायालयों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और पर्यावरण संरक्षण के मामलों में ढिलाई को अस्वीकार्य बताया। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है।
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सुखना झील के संरक्षण में बिल्डर माफिया की भूमिका पर उठे सवाल

सुखना झील की बिगड़ती स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता


नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील की deteriorating स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि झील का सूखना केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि मानव गतिविधियों और अवैध कार्यों के कारण भी हो रहा है।


CJI की तीखी टिप्पणी: बिल्डर माफिया और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत

बिल्डर माफिया और नौकरशाही पर भड़के CJI 
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बिल्डर माफिया और कुछ सरकारी अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि सुखना झील को और कितना नुकसान पहुंचाया जाएगा। अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण झील का अस्तित्व संकट में है।


पुराने जनहित मामले में उठी चिंता

पुराने जनहित मामले की सुनवाई के दौरान उठी चिंता
यह टिप्पणी 1995 से लंबित जनहित याचिका 'इन रे: टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद' से संबंधित अंतरिम आवेदनों की सुनवाई के दौरान की गई। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही थी।


उच्च न्यायालय की अनदेखी पर सवाल

हाई कोर्ट की अनदेखी पर कोर्ट का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि जंगलों और झीलों से संबंधित मामलों को सीधे उच्चतम न्यायालय में क्यों लाया जा रहा है, जबकि इनसे जुड़े कई विषयों पर उच्च न्यायालय प्रभावी ढंग से सुनवाई कर सकता है। बेंच ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के संतुलन के लिए चिंताजनक बताया।


दोस्ताना मुकदमे की आशंका

‘दोस्ताना मुकदमे’ की आशंका
अदालत ने संकेत दिया कि कुछ मामलों में निजी डेवलपर्स और अन्य हितधारकों के इशारे पर तथाकथित "दोस्ताना मुकदमे" दायर किए जा रहे हैं, ताकि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा सके। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और वन मामलों में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर से ऐसे स्थानीय मुद्दों की पहचान करने को कहा, जिन्हें उच्च न्यायालयों में सुलझाया जा सकता है।


सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्र पर विवाद

सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्र पर विवाद
चंडीगढ़ स्थित सुखना झील का मामला मुख्य रूप से इसके जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने से संबंधित है। इस संदर्भ में उच्च न्यायालय ने पहले ही सख्त रुख अपनाते हुए वर्ष 2020 में संरक्षित क्षेत्र में बनी अवैध संरचनाओं को गिराने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।