Newzfatafatlogo

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को भेजा नोटिस, ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक गंभीर नोटिस जारी किया है, जिसमें ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है और 8 जनवरी की घटना का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने उसकी कानूनी जांच में हस्तक्षेप किया। जानें इस मामले में और क्या हुआ है और तृणमूल कांग्रेस का क्या कहना है।
 | 
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को भेजा नोटिस, ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोप

सुप्रीम कोर्ट का गंभीर नोटिस


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक गंभीर नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी के कार्यालय में ईडी की तलाशी में रुकावट डाली। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य पुलिस द्वारा एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने का आदेश दिया और 8 जनवरी की घटना का पूरा सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।


ईडी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की गंभीरता को अत्यंत गंभीर बताया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में गहन न्यायिक जांच की आवश्यकता है ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी राज्य की कानून-प्रवर्तन एजेंसी के संरक्षण में अपराधियों को बचने का अवसर न मिले। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से तीन दिन के भीतर ईडी की याचिका का जवाब देने को कहा है।


सीबीआई जांच की मांग

ईडी ने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी कानूनी जांच में हस्तक्षेप किया। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए 3 फरवरी तक सभी एफआईआर पर रोक लगा दी। इसके साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि 8 जनवरी की घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को बिना किसी बदलाव के सुरक्षित रखा जाए।


कलकत्ता हाई कोर्ट में हुई गड़बड़ी

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट में हुई गड़बड़ी पर भी चिंता व्यक्त की। आई-पीएसी से जुड़े परिसरों में तलाशी के दौरान कोर्टरूम में अराजकता उत्पन्न हो गई थी, जिसके कारण सुनवाई को 14 जनवरी तक स्थगित करना पड़ा। ईडी का आरोप है कि राज्य सरकार की कार्रवाई ने एजेंसी की वैधानिक जांच में बाधा डाली और इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए।


विपक्ष और ईडी की दलीलें

ईडी ने अदालत से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन की मांग की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ईडी केवल कानूनी दायरे में कार्रवाई कर रही है और कोई निजी लाभ नहीं ले रही। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह कहते हुए कि मामला पहले हाई कोर्ट में सुना जाना चाहिए, ईडी पर समानांतर कार्यवाही का आरोप लगाया।


तृणमूल कांग्रेस का पक्ष

ईडी ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने परिसर में प्रवेश कर महत्वपूर्ण सबूत हटाए, जबकि मुख्यमंत्री ने एजेंसी पर दखल देने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस ने किसी भी बाधा डालने से इनकार किया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।