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सुप्रीम कोर्ट ने मालदा बंधक मामले में NIA को जांच सौपी

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने का आदेश दिया है। मुख्य सचिव की प्रशासनिक नाकामी पर अदालत ने नाराजगी जताई है। यह मामला 1 अप्रैल को हुई घटना से जुड़ा है, जब भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को पूर्व नियोजित साजिश बताया और जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने मालदा बंधक मामले में NIA को जांच सौपी

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर भारत की सर्वोच्च अदालत ने सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य पुलिस पर लगे आरोप गंभीर हैं, इसलिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप आवश्यक है।


मुख्य सचिव पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान, अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव पर तीखा प्रहार किया। जब मालदा में न्यायाधीशों को भीड़ ने घेर लिया था, तब कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मुख्य सचिव को फोन किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अदालत ने इसे 'प्रशासन की पूरी नाकामी' करार दिया। अधिकारी द्वारा 'फ्लाइट में होने' का बहाना अदालत ने खारिज कर दिया और उन्हें बिना किसी बहाने के माफी मांगने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी चिंता व्यक्त की कि सरकारी दफ्तरों में बढ़ता राजनीतिक दखल नौकरशाही की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है।


मालदा की घटना: पूर्व नियोजित साजिश

मालदा की घटना: 'पूर्व नियोजित साजिश'


यह विवाद 1 अप्रैल को उस घटना से संबंधित है, जब मालदा में मतदाता सूची के विशेष सारांश संशोधन (SIR) के कार्य में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को एक उग्र भीड़ ने घंटों तक बंधक बना लिया। इनमें तीन महिला जज भी शामिल थीं। भीड़ का आरोप था कि मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे 'पूर्व नियोजित और उकसावे का परिणाम' बताया। इससे पहले, अदालत ने जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती का आदेश भी दिया था।


NIA को जांच की खुली छूट

NIA को जांच की खुली छूट


सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद, राज्य पुलिस द्वारा दर्ज सभी FIR अब NIA के अधीन होंगी। एजेंसी को गिरफ्तार किए गए 26 व्यक्तियों से पूछताछ करने और आवश्यकता पड़ने पर नई FIR दर्ज करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। अदालत ने NIA को समय-समय पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका अपनी स्वतंत्रता और गरिमा पर होने वाले किसी भी हमले को गंभीरता से लेगी।