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सुप्रीम कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 सिख दंगों के मामले में जमानत देने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख दंगों के आरोपी सज्जन कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सज्जन कुमार ने अदालत में अपनी पत्नी की बीमारी का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को अस्वीकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी। सज्जन कुमार पहले से ही एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सज्जन कुमार के तर्क।
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सुप्रीम कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 सिख दंगों के मामले में जमानत देने से किया इनकार

सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से झटका

नई दिल्ली - 1984 के दिल्ली सिख दंगों के आरोपी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से मना कर दिया है।


सज्जन कुमार ने अदालत में यह तर्क रखा कि वह पिछले 7 साल 4 महीने से जेल में हैं और उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं, जिससे वह उनसे नहीं मिल पाए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को अस्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2013 में सज्जन कुमार को निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था।


इससे पहले, 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था, जिसमें दो लोगों की जान गई थी। इस मामले के पुनः उजागर होने के बाद, विशेष जांच दल (एसआईटी) ने फरवरी 2015 में सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर जनकपुरी में 1 नवंबर 1984 को सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी एफआईआर 2 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने की घटना के लिए दर्ज की गई थी।


इन मामलों में, सज्जन कुमार ने 7 जुलाई 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि वह कभी भी 1984 के सिख विरोधी दंगों में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने जांच एजेंसी पर निष्पक्ष जांच न करने का आरोप भी लगाया। सज्जन कुमार पहले से ही 1984 दंगों के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, जिसमें उन्हें दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में दोषी ठहराया गया था।