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सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर गरमागरम बहस

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर हुई सुनवाई में तीखी बहस देखने को मिली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी द्वारा दायर मानहानि के मामले में दोनों पक्षों ने गंभीर आरोप लगाए। बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जबकि अभियोजन पक्ष ने दस्तावेज जालसाजी का मामला उठाया। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच हुई बहस ने मामले को और गरमा दिया। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर अपना निर्णय सुनाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर गरमागरम बहस

नई दिल्ली में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर सुनवाई


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को तीखी बहस हुई। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी द्वारा दायर मानहानि के मामले से संबंधित है। बहस के दौरान पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी और असम सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच तीखे तर्क हुए। सिंघवी ने मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत हमले करते हुए उन्हें 'संवैधानिक काउबॉय' कहा, जबकि मेहता ने फर्जी दस्तावेजों का मुद्दा उठाकर हिरासत की आवश्यकता पर जोर दिया।


सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई का विवरण

सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई शुरू हुई। खेड़ा पर असम के मुख्यमंत्री की पत्नी ने मानहानि का मामला दर्ज किया है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जबकि अभियोजन पक्ष ने इसे गंभीर दस्तावेज जालसाजी का मामला कहा।


अभिषेक मनु सिंघवी की तीखी दलीलें

पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला किया। उन्होंने उन्हें 'संवैधानिक काउबॉय' और 'संवैधानिक रेम्बो' कहा। सिंघवी ने कहा कि यदि डॉ. अंबेडकर आज यह देखते कि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह बोल रहा है, तो उन्हें बहुत दुख होता। उन्होंने पुलिस की भारी फोर्स की घेराबंदी पर भी सवाल उठाया।


तुषार मेहता का जवाब

असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए पासपोर्ट फर्जी और जाली हैं। मेहता ने कहा कि मामले की सच्चाई जानने के लिए खेड़ा की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि दस्तावेज जालसाजी का गंभीर मामला है।


दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि खेड़ा एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं और उनके भागने का कोई खतरा नहीं है। अधिकांश धाराएं जमानती हैं, इसलिए हिरासत की आवश्यकता नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है। दोनों पक्षों की तीखी बहस के बाद अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर अपना निर्णय सुनाएगा।