Newzfatafatlogo

हरियाणा में कांग्रेस के करमबीर बौद्ध ने राज्यसभा चुनाव में जीती मामूली बढ़त

हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के करमबीर बौद्ध ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की, लेकिन यह जीत मामूली अंतर से हुई। कांग्रेस के विधायकों की क्रॉस वोटिंग और अवैध वोटों ने चुनाव को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन राहुल गांधी के उम्मीदवार चयन ने पार्टी के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। जानें इस चुनाव के पीछे की पूरी कहानी और कांग्रेस की भविष्य की रणनीतियाँ।
 | 
हरियाणा में कांग्रेस के करमबीर बौद्ध ने राज्यसभा चुनाव में जीती मामूली बढ़त

राज्यसभा चुनाव में करमबीर बौद्ध की जीत

हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार करमबीर बौद्ध ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की है, लेकिन यह जीत बहुत ही मामूली अंतर से हुई। कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जबकि चार विधायकों के वोट अवैध घोषित कर दिए गए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा और पार्टी के नेताओं के दबाव के बाद एक विधायक का वोट मान्यता प्राप्त कर गया, अन्यथा वह भी अवैध हो जाता। इसी प्रकार, भाजपा का भी एक वोट अवैध हुआ, जिसके बाद बौद्ध की जीत 28 वोटों पर सुनिश्चित हुई।


आप सोचिए, हरियाणा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और जीत के लिए 31 वोटों की आवश्यकता थी। इंडियन नेशनल लोकदल के दो विधायकों ने वोटिंग में भाग नहीं लिया, जिससे जीत का आंकड़ा 30 पर आ गया। लेकिन 37 विधायकों वाली पार्टी के उम्मीदवार को केवल 28 वोट मिले। इसके लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा को काफी मेहनत करनी पड़ी। 78 वर्षीय हुड्डा खुद चुनाव एजेंट बने और हर विधायक पर नजर रखी। वास्तव में, राहुल गांधी ने ऐसा उम्मीदवार चुना था, जिसकी जीत पहले से ही मुश्किल लग रही थी। करमबीर बौद्ध कांग्रेस से जुड़े नहीं थे। प्रदेश कांग्रेस ने पहले ही कहा था कि राहुल किसी बाहरी को उम्मीदवार न बनाएं। प्रदेश में दो बार राज्यसभा चुनाव में गड़बड़ी हो चुकी थी, फिर भी राहुल ने बौद्ध को उम्मीदवार बनाकर पार्टी नेताओं को मुश्किल में डाल दिया। अब अगले चुनाव, यानी 2028 के लिए भी कांग्रेस की चुनौतियाँ बढ़ गई हैं।