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हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के उम्मीदवार करमबीर बौद्ध की स्थिति पर उठे सवाल

हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार करमबीर बौद्ध की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के भीतर असंतोष और क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच, भाजपा द्वारा कांग्रेस विधायकों को आकर्षक प्रलोभन दिए जाने की खबरें हैं। जानें इस चुनावी समीकरण का क्या असर होगा और करमबीर बौद्ध की जीत की संभावनाएं क्या हैं।
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हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के उम्मीदवार करमबीर बौद्ध की स्थिति पर उठे सवाल

कांग्रेस का चुनावी इतिहास दोहराने का खतरा

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी का इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराने की संभावना है। करमबीर बौद्ध, जो कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, चुनाव हार सकते हैं। पहले भी आरके आनंद और अजय माकन जैसे नेता राज्यसभा चुनाव में असफल रहे हैं। इस बार प्रदेश कांग्रेस ने सुझाव दिया था कि किसी सक्षम नेता को उम्मीदवार बनाया जाए, लेकिन राहुल गांधी ने अपनी पसंद से करमबीर बौद्ध को चुना, जो पार्टी के सक्रिय नेता नहीं हैं। वे एक पूर्व सरकारी कर्मचारी हैं।


कांग्रेस के कई नेता इस निर्णय से असंतुष्ट हैं। खासकर तब जब बौद्ध ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे भूपेंद्र सिंह हुड्डा या राव नरेंद्र सिंह से मुलाकात के दौरान कांग्रेस का पटका नहीं पहना, बल्कि नीले रंग का पटका गले में डाला। पार्टी में यह भी चर्चा हो रही है कि यदि राहुल को दलित उम्मीदवार देना था, तो किसी अन्य जाति का उम्मीदवार क्यों नहीं चुना गया, जबकि करमबीर जिस जाति से हैं, उसके दो लोकसभा सांसद पहले से मौजूद हैं।


क्रॉस वोटिंग की आशंका

कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए अपने सभी विधायकों को हिमाचल प्रदेश में रखा है और सोमवार को मतदान के समय उन्हें लाने की योजना बनाई है। हालांकि, जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार भी 12 से 13 विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। भाजपा के पास 51 विधायकों का समर्थन है, और एक सीट जीतने के लिए 31 वोटों की आवश्यकता है। इसका मतलब है कि एक सीट जीतने के बाद भाजपा के पास 20 वोट बचेंगे।


भाजपा को 11 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है, जो निर्दलीय सतीश नंदल से मिल सकते हैं। यदि इनेलो के दो विधायक समर्थन नहीं देते और कांग्रेस के 37 में से 12 से 13 विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं, तो करमबीर बौद्ध हार सकते हैं और नंदल जीत सकते हैं।


भाजपा के प्रलोभन

राज्यसभा चुनाव ओपन बैलेट से होते हैं, लेकिन दलबदल कानून लागू नहीं होता, जिसका मतलब है कि क्रॉस वोटिंग करने पर सदस्यता नहीं जाती। भाजपा की ओर से कांग्रेस विधायकों को आकर्षक प्रलोभन दिए जाने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि यदि कांग्रेस इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर को लिखती है, तो स्पीकर इसे लंबित रख सकते हैं या क्रॉस वोटिंग करने वालों को अलग गुट की मान्यता भी दे सकते हैं।


भाजपा ने यह भी आश्वासन दिया है कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को सत्तापक्ष के सभी लाभ दिए जाएंगे और उनके क्षेत्र के सभी कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि यदि वे आज क्रॉस वोटिंग करते हैं, तो उन्हें 2028 में भी ऐसा ही अवसर मिलेगा।