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हिमाचल कांग्रेस ने नगर निगम चुनावों में हार के कारणों की जांच के लिए कमेटियां बनाई

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में हार के कारणों की जांच के लिए तीन फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों का गठन किया है। ये कमेटियां संबंधित क्षेत्रों में जाकर चुनाव परिणामों का गहन अध्ययन करेंगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के निर्देश पर गठित इन कमेटियों का उद्देश्य हार के कारणों की पहचान करना और भविष्य की रणनीति को मजबूत बनाना है। रिपोर्ट एक सप्ताह में प्रस्तुत की जाएगी, जिससे पार्टी के प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जा सकेगा।
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हिमाचल कांग्रेस ने नगर निगम चुनावों में हार के कारणों की जांच के लिए कमेटियां बनाई

तीन फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों का गठन


Himachal Congress News | शिमला। हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला, मंडी और सोलन नगर निगम चुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) ने चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए तीन फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों का गठन किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के निर्देश पर ये कमेटियां संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में जाकर चुनाव परिणामों का गहन अध्ययन करेंगी और हार के कारणों का पता लगाएंगी।


एचपीसीसी के महासचिव (संगठन) विनोद जिंटा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ये कमेटियां चुनाव परिणामों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करेंगी। इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों से बातचीत कर उन कारणों की पहचान की जाएगी, जिनका चुनावी नतीजों पर प्रभाव पड़ा। कमेटियों को अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपनी होगी।


धर्मशाला नगर निगम के लिए गठित कमेटी की अध्यक्षता एचपीसीसी के उपाध्यक्ष करण सिंह पठानिया करेंगे, जबकि अमित भारमौरी, यशवंत खन्ना और मनमोहन कटोच को सदस्य बनाया गया है। मंडी नगर निगम की समीक्षा के लिए एचपीसीसी के उपाध्यक्ष चेतराम ठाकुर को संयोजक नियुक्त किया गया है, और उनके साथ पवन ठाकुर, हरिकृष्ण हिमराल तथा सत्यजीत नेगी सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।


सोलन नगर निगम के लिए एचपीसीसी के उपाध्यक्ष अमित नंदा को संयोजक बनाया गया है, जबकि चंद्रशेखर शर्मा, यशपाल तनिक और धर्मेंद्र धामी को कमेटी में सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस संगठन का मानना है कि इन कमेटियों की रिपोर्ट से चुनावी प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ आकलन हो सकेगा और भविष्य में संगठनात्मक रणनीति को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।