हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की स्थानीय चुनावों में हार से बढ़ी चिंताएं
स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की स्थिति
हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टियों की जीत का सिलसिला जारी है। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने शानदार सफलता प्राप्त की है, जबकि गुजरात में भाजपा ने सभी सीटें जीती हैं। तेलंगाना में कांग्रेस ने भी बड़ी जीत दर्ज की। हालांकि, केरल में कांग्रेस ने वाम मोर्चे को हराया, जो एक अपवाद था। कांग्रेस की यह जीत विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिली। लेकिन हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की हार, जो कि उसके गढ़ मानी जाती है, चिंता का विषय बन गई है। यहां कांग्रेस केवल पालमपुर में जीत हासिल कर पाई है।
ध्यान देने योग्य है कि अगले वर्ष के अंत में हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस के भीतर की कलह और बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पहले भी अपने कार्यकाल की शुरुआत में बगावत का सामना करना पड़ा था, जब उनके विधायकों ने विद्रोह किया था और कांग्रेस राज्यसभा का चुनाव हार गई थी। हालांकि, उपचुनाव में सुक्खू ने पार्टी को जीत दिलाई और अपना बहुमत मजबूत किया। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के परिवार ने भी सुक्खू के नेतृत्व को स्वीकार किया था। लेकिन अब एक बार फिर से खींचतान शुरू होने की संभावना है। कांग्रेस को इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। हिमाचल प्रदेश में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक स्थिति है। केंद्र से सहयोग की कमी के कारण लोक कल्याण की योजनाओं को जारी रखना सरकार के लिए कठिन हो रहा है।
