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हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने दलबदल विरोधी विधेयक पारित किया, पेंशन पर नया नियम लागू

हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया है, जिसके तहत दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत अयोग्य ठहराए गए विधायकों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह निर्णय मार्च 2024 में छह कांग्रेस विधायकों की अयोग्यता के बाद लिया गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे जनादेश का सम्मान करने का कदम बताया, जबकि भाजपा ने विधेयक की कड़ी आलोचना की है। जानें इस विधेयक के प्रभाव और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बारे में।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने दलबदल विरोधी विधेयक पारित किया, पेंशन पर नया नियम लागू

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का महत्वपूर्ण निर्णय


नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 2 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया, जिसका नाम है हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026। इस विधेयक के अनुसार, दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए विधायकों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह विधेयक वॉयस वोट के माध्यम से पारित किया गया। यह निर्णय मार्च 2024 में स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया द्वारा छह कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित करने के बाद लिया गया है।


किस पर पड़ेगा असर?

नए नियमों के अनुसार, पहली बार विधायक बने चैतन्य शर्मा (गगरेट) और देवेंद्र भुट्टो (कुटलेहर) अब पेंशन के हकदार नहीं रहेंगे। इसके अलावा, उपचुनाव हार चुके रवि ठाकुर और राजिंदर राणा को 14वीं विधानसभा के लिए पेंशन नहीं मिलेगी। हालांकि, दोबारा चुने गए सुधीर शर्मा और इंदर दत्त लखनपाल इस नए कानून से प्रभावित नहीं होंगे।


अयोग्यता का कारण

फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के कारण इन छह विधायकों को अयोग्य ठहराया गया था। इसके साथ ही, बजट और कटौती प्रस्तावों पर कांग्रेस सरकार का समर्थन न करने के लिए पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया था।


मुख्यमंत्री सुक्खू का बयान

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य कांग्रेस को लाभ पहुंचाना नहीं है। उन्होंने इसे जनादेश का सम्मान करने और राजनीतिक दलबदल पर रोक लगाने का कदम बताया।


सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य की 75 लाख जनता ने 2024 में सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संशोधन मौजूदा विधानसभा पर लागू होगा और वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रभावी होगा।


भाजपा का विरोध

भाजपा ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना की है। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि दलबदल पर अंकुश लगाना उचित है, लेकिन कानून को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करना गलत है। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि यह विधेयक राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक कानूनी जांच में टिक नहीं पाएगा और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।


भाजपा का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से चुनाव हारने के बाद भी पूर्व विधायकों को पेंशन मिलती रही है। एक बार निर्वाचित होने पर विधायक इन लाभों के हकदार हो जाते हैं।


सरकार का स्पष्टीकरण

संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह विधेयक दलबदल जैसी प्रथाओं को रोकने के लिए लाया गया है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दलबदल का समर्थन करने का संदेश दे रही है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि विधेयक विस्तृत चर्चा के बाद लाया गया है।