फिरोजाबाद: महाभारत काल से पहले के शिव मंदिर के हैं कई चमत्कार, महाशिवरात्रि पर उमड़ा भक्तों का सैलाब
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फिरोजाबाद, 26 फरवरी (हि.स.)। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बुधवार को सैकडों वर्ष पुराने महाभारत काल से पहले के शिव मंदिर पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने कांवड़ चढ़ाई। भगवान शिव की स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालु बेताब नजर आए। बच्चों ने विशाल मेले का भी लुफ्त उठाया। चारों ओर बम भोले की गूंज रही।
खैरगढ़ के गांव साती स्थित शिव मंदिर के महंत लवकुश महाराज बताते है कि उनके पूर्वजों ने बताया है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत से पहले भीष्म पितामह के पिता महाराजा शांतनु ने कराया था। इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग जमीन की खुदाई के दौरान निकली थी। तब से लेकर आज तक इस मंदिर में बड़ी संख्या में शिव भक्त पूजा अर्चना करने आते है। यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। इस शिवलिंग की गहराई जानने के लिए कई बार खुदाई भी हो चुकी है। लेकिन आज तक यह पता नहीं लग सका कि शिवलिंग जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है। मान्यता है कि आज तक कोई भी शर्त लगाकर इस शिवलिंग को अपनी बाहों में नहीं भर पाया। मंदिर के पास ही एक किला है, जो अब खंडहर हो चुका है। इस मंदिर से कई चमत्कार भी जुड़े हैं। महंत का कहना है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से आता है। उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं।
इसी जगह से है भीष्म पितामह की निकासीमान्यता यह भी है कि भीष्म पितामह के पिताश्री महाराज शांतनु भगवान शिवजी की आराधना करते थे। उनके समय में एक सांप प्रतिदिन एक ही स्थान पर आकर बैठता था। इसके साथ ही उसी स्थान पर एक गाय आकर खड़ी हो जाती थी। जिसका दूध उसी स्थान कर स्वयं निकलता था। महाराजा शांतुन ने जब उस स्थान की खुदाई कराई तो वहां शिवलिंग निकली। जिसकी स्थापना करा दी गई। महाराजा शांतुन ने मंदिर बनाया। जिसका अब जीर्णोद्धार हो गया है। महंत बताते है कि भीष्म पितामह की निकासी इसी जगह से है। महाभारत के युुद्ध के बाद फिर कोई यहां नहीं आया। महाराज शांतनु मंदिर का निर्माण होने के बाद यहां से चले गए थे।
महाशिवरात्रि पर लगा लख्खी मेलामहाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बुधवार को इस मंदिर पर लक्खी मेले का आयोजन हुआ। जिसमें भारी संख्या में श्रृद्वालुओं व आस पास के ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी। बच्चों ने खेल तमाशे व झूलों का लुफ्त उठाया।
हिन्दुस्थान समाचार / कौशल राठौड़