बिहार की राजनीति में नया मोड़: नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल भंग किया
बिहार में राजनीतिक बदलाव की शुरुआत
बिहार की राजनीतिक स्थिति में लगभग 20 वर्षों के बाद एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। आज, मंगलवार को, नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल को भंग कर दिया है और अब वे कुछ समय में राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपने वाले हैं। इस कदम से बिहार में बीजेपी के लिए रास्ता साफ हो गया है।
बीजेपी की सरकार का गठन
बिहार विधानसभा में 89 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा विधायक दल की बैठक आज दोपहर 2 बजे पार्टी कार्यालय में आयोजित की जाएगी, जिसके बाद एनडीए की विस्तारित बैठक शाम 4 बजे विधानसभा के केंद्रीय कक्ष में होगी। इस सब के बीच, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष पहले से ही पटना पहुंच चुके हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पुष्टि की है कि एनडीए बैठक में नए विधायक दल नेता के नाम पर औपचारिक निर्णय लिया जाएगा।
जेडीयू कार्यकर्ताओं की भावनाएं
जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने नीतीश कुमार के कार्यकाल को भावुकता के साथ याद किया। उन्होंने कहा कि यह बिहार के 14 करोड़ लोगों के लिए एक भावुक क्षण है। नीतीश जी के नेतृत्व से पहले, हमें 'बिहारी' कहलाने में शर्म आती थी, लेकिन उनके कार्यकाल में बिहार का मान-सम्मान पूरे देश में बढ़ा है। संजय झा को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है और इस पल में उन्हें भी भावुक होते देखा गया।
नीतीश कुमार का अंतिम सरकारी कार्यक्रम
इससे पहले, नीतीश कुमार ने भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। यह उनका अंतिम सरकारी कार्यक्रम था। नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ बिहार में एक लंबे युग का अंत हो गया है। हालांकि एनडीए गठबंधन बना रहेगा, लेकिन अब सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथ में आने वाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।
