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बिहार के मुख्यमंत्री का विपक्ष पर हमला: महिला आरक्षण विधेयक का विरोध

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने पर विपक्ष पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने नारी शक्ति के साथ धोखा किया है और लोकतंत्र का अपमान किया है। चौधरी ने कहा कि विपक्षी दल अपनी परिवार की महिलाओं को सांसद बनाने के पक्ष में हैं, लेकिन आम और गरीब बेटियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहते। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि उनकी पार्टियां महिला सांसदों की संख्या बढ़ने से डरती हैं। जानें इस सियासी घमासान के पीछे की पूरी कहानी।
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बिहार के मुख्यमंत्री का विपक्ष पर हमला: महिला आरक्षण विधेयक का विरोध

महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी घमासान


लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को कांग्रेस, राजद, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष ने नारी शक्ति के साथ विश्वासघात किया है और लोकतंत्र का अपमान किया है।


विपक्ष की नीयत पर सवाल

सीएम चौधरी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपनी परिवार की महिलाओं को सांसद बनाने के पक्ष में हैं, लेकिन देश की आम और गरीब बेटियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में असफल हैं। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि नारी शक्ति से जुड़े विधेयक का अपमान हुआ है। यह पहली बार है जब कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दल इस मुद्दे पर खुशी मना रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि लालू प्रसाद यादव पहले भी विधेयकों को फाड़ने का काम करते थे, लेकिन इस बार विपक्ष ने खुलकर विधेयक को पास होने से रोक दिया।


राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना

सीएम ने कहा कि राहुल गांधी की बहन सांसद बन सकती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की एक तिहाई सीटों पर बहनें चुनाव जीतकर संसद में नहीं जा सकतीं, यह कांग्रेस नहीं चाहती। इसी तरह, अखिलेश यादव की पत्नी सांसद बन सकती हैं, लेकिन यूपी से 40 महिला सांसदों का होना समाजवादी पार्टी बर्दाश्त नहीं कर सकती। सम्राट चौधरी ने कहा कि यदि 17 अप्रैल को विधेयक पास हो जाता, तो यह एक ऐतिहासिक दिन होता। उन्होंने बताया कि तीन महत्वपूर्ण बिल आने वाले थे, लेकिन विपक्ष ने सभी का विरोध किया। बिहार के संदर्भ में, यदि विधेयक पास होता, तो राज्य में महिला विधायकों की संख्या 122 हो जाती, जबकि वर्तमान में केवल 29 महिला विधायक हैं। इसी प्रकार, लोकसभा में बिहार की महिला सांसदों की संख्या भी बढ़कर 20 हो जाती, जबकि अभी केवल 4 हैं।