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बिहार में पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार का मामला, तीन अधिकारी निलंबित

बिहार के समस्तीपुर में एक ज्वेलरी दुकान के कर्मचारी के साथ पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि उसे कबूलनामा कराने के लिए प्रताड़ित किया गया और उसके स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट आई। पुलिस ने इस मामले में तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया और रिश्वत मांगी गई। प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
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बिहार में पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार का मामला, तीन अधिकारी निलंबित

पटना: समस्तीपुर में पुलिस हिरासत का गंभीर मामला


पटना: बिहार के समस्तीपुर जिले से एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया गया है। एक ज्वेलरी दुकान के कर्मचारी को चोरी के संदेह में पकड़ा गया था, और उसके साथ हिरासत में मारपीट की गई। आरोप है कि उसे कबूलनामा कराने के लिए पेट्रोल डालकर प्रताड़ित किया गया। चार दिन बाद रिहा होने पर उसकी तबीयत बिगड़ गई, और अब वह अस्पताल में गंभीर स्थिति में है। इस मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।


चोरी के मामले में हिरासत और प्रताड़ना

यह मामला दिसंबर में समस्तीपुर की एक ज्वेलरी दुकान से 60 ग्राम सोने की चोरी के बाद शुरू हुआ। पुलिस ने दुकान में काम करने वाले युवक और उसके दो साथियों को हिरासत में लिया। आरोप है कि दुकान के मालिक ने भी कर्मचारियों के साथ मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। 31 दिसंबर को पुलिस ने तीनों को थाने ले जाकर पूछताछ की।


हिरासत में अमानवीय यातना का आरोप

पीड़ित युवक ने बताया कि चार दिन की हिरासत के दौरान उसे लगातार पीटा गया। उसने यह भी दावा किया कि कबूलनामा लेने के लिए उसके निजी अंगों पर पेट्रोल डाला गया। घर की तलाशी में कोई चोरी का सामान नहीं मिलने के बावजूद उस पर दबाव बनाया गया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे 5 जनवरी को जमानत पर रिहा किया गया।


रिहाई के बाद स्वास्थ्य में गिरावट

जब युवक घर पहुंचा, तो उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिवार ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक की मारपीट और मानसिक तनाव के कारण उसकी हालत नाजुक हो गई है। परिवार का मानना है कि यदि समय पर कार्रवाई की गई होती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।


रिश्वत मांगने और परिवार को फंसाने का आरोप

पीड़ित की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें और उनके पति को ताजपुर थाने में तीन दिन तक रखा और 50 हजार रुपये की मांग की ताकि उन्हें छोड़ा जा सके। इस दौरान घर की तलाशी ली गई, लेकिन कोई गहना बरामद नहीं हुआ।


तीन पुलिसकर्मी निलंबित, जांच जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने थानाध्यक्ष शंकर शरण दास सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। एसपी ने कहा कि हिरासत में हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि कोई दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है।