BMC मेयर पद पर सियासी संग्राम: संजय राउत का शिंदे पर हमला
महाराष्ट्र में मेयर पद की राजनीतिक खींचतान
महाराष्ट्र: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के हालिया निकाय चुनावों के परिणामों के बाद मेयर पद को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। महायुति गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद, सहयोगी दलों के बीच इस पद को लेकर विवाद जारी है।
शिवसेना के शिंदे गुट ने मेयर की मांग की है और अपने पार्षदों को एक होटल में रखा हुआ है। इस पर शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संजय राउत का कड़ा बयान
संजय राउत ने कहा कि कई पार्षद उनके संपर्क में हैं और कोई भी नहीं चाहता कि बीजेपी का उम्मीदवार मेयर बने। यहां तक कि एकनाथ शिंदे भी बीजेपी के मेयर के खिलाफ हैं। इसी कारण शिंदे ने होटल को एक तरह से जेल बना दिया है।
जीते हुए पार्षदों को वहां बंद रखा गया है ताकि कोई उन पर प्रभाव न डाल सके। राउत ने इसे अन्याय बताया और कहा कि इन पार्षदों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यह उनका अधिकार है और मुख्यमंत्री को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
ताज होटल में पार्षदों की कैद
राउत ने ताज होटल का विशेष उल्लेख किया, जहां जीते हुए पार्षदों को कैद किया गया है। उन्होंने कहा कि शिंदे को डर है कि उनके पार्षदों को कोई खरीद न ले। लेकिन राउत ने यह भी कहा कि कई लोग अभी भी उनके संपर्क में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह तरीका गलत है और पार्षदों की स्वतंत्रता पर हमला है।
शिंदे का डर क्यों?
संजय राउत ने मजाक में कहा कि एकनाथ शिंदे, जो उपमुख्यमंत्री हैं, फिर भी अपने पार्षदों के भागने का डर महसूस कर रहे हैं। यह राजनीति की हास्यास्पद स्थिति है। राउत ने याद दिलाया कि पहले शिंदे ने विधायकों को तोड़कर उन्हें सूरत जैसे स्थानों पर छिपाया था।
अब वही स्थिति पार्षदों के साथ दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि शिंदे का गुट बीजेपी का हिस्सा है और अमित शाह उनके बॉस हैं, लेकिन देवेंद्र फडणवीस उनकी बात नहीं मानेंगे। सभी ने तय कर लिया है कि बीजेपी का मेयर नहीं बनेगा।
मेयर पद की सियासी जंग
बीएमसी के 227 वार्डों में बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिंदे गुट ने 29। बहुमत के लिए 114 सीटें चाहिए, इसलिए बीजेपी को शिंदे के कम से कम 25 पार्षदों का समर्थन चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सब कुछ सामान्य है और बातचीत से मेयर का चुनाव होगा।
हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सब कुछ ठीक होता तो पार्षदों को होटल में बंद करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह स्थिति 2022 में शिवसेना के टूटने की याद दिलाती है, जब शिंदे ने विधायकों को इसी तरह नियंत्रित किया था।
