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सात देशों के बिमस्टेक शिखर सम्मेलन में नैनीताल के चित्रांश ने किया भारत का प्रतिनिधित्व

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सात देशों के बिमस्टेक शिखर सम्मेलन में नैनीताल के चित्रांश ने किया भारत का प्रतिनिधित्व


नैनीताल, 26 फ़रवरी (हि.स.)। कृषि एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित गोविंद बल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष के नैनीताल निवासी विद्यार्थी चित्रांश देवलियाल ने नई दिल्ली में आयोजित बिमस्टेक यानी ‘बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन’ में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

विदेश मंत्रालय और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के तत्वावधान में आयोजित यह शिखर सम्मेलन 19 से 24 फरवरी तक विश्व युवक केंद्र में आयोजित हुआ, जिसमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड सहित सात देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समारोह में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खंडेलवाल, पेशेवर मुक्केबाज विजेंदर सिंह, विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (बिमस्टेक और सार्क) सीएसआर राम और भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

चित्रांश ने निभायी उल्लेखनीय भूमिका

इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले नौ सदस्यीय दल में तोशी कलबांडे के नेतृत्व में रविना राजपुरोहित, राहुल शर्मा, विवेक, ईशिका वारवड़े, जया शर्मा, श्रेया पोपली, अदिति शर्मा और चित्रांश देवलियाल प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित हुए। ये सभी पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन के विषयों पर सक्रियता से कार्यरत हैं।

जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर व्यापक चर्चा

शिखर सम्मेलन में चित्रांश देवलियाल ने कृषि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को पुर्नस्थापित करने, जैव विविधता को बढ़ाने और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर बल दिया। उनके सुझाव से किसानों के सशक्तिकरण के साथ क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा और सतत विकास को बल मिल सकता है।

संयुक्त बयान में शामिल हुआ भारत का प्रस्ताव

चित्रांश देवलियाल के प्रस्ताव को सम्मेलन में व्यापक समर्थन मिला और अंततः इसे सभी सात देशों के संयुक्त बयान में शामिल किया गया। उनकी यह उपलब्धि पारंपरिक कृषि पद्धतियों को वैश्विक स्थिरता प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी