दिल्ली-एनसीआर में दूषित जल संकट: प्रशासन की नई रणनीतियाँ
नई दिल्ली में जल संकट की चिंता
नई दिल्ली: इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह शहर, जिसे स्वच्छता के लिए जाना जाता था, अब एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। इस घटना के बाद, दिल्ली-एनसीआर का प्रशासन भी सतर्क हो गया है और रेड अलर्ट पर है।
दूषित जल आपूर्ति पर प्रशासन की कार्रवाई
गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों से लगातार दूषित जल आपूर्ति की शिकायतें मिल रही हैं। प्रशासन ने अब पुरानी पाइपलाइनों और अवैध बोरवेलों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि क्या यह सिर्फ एक दिखावा है या प्रशासन वास्तव में सक्रिय हो गया है।
बोरवेल सील करने से आगे बढ़ने की आवश्यकता
दिल्ली जल बोर्ड अवैध जल दोहन को रोकने के लिए नई सख्त गाइडलाइंस लागू कर रहा है। पहले केवल बोरवेल सील करने तक ही सीमित था, लेकिन अब भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी के नियमों को अपडेट किया जा रहा है, और ट्यूबवेल की अनुमति केवल उन क्षेत्रों में दी जाएगी जहां जल स्तर बेहतर है।
गाजियाबाद में जल गुणवत्ता की जांच
गाजियाबाद में भी प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने वाटर वर्क्स डिपार्टमेंट और सैनिटेशन टीम को सक्रिय किया है। शहर के 1400 से अधिक ट्यूबवेल और 6000 हैंडपंपों की जांच की जा रही है, और पानी में क्लोरीन की मात्रा की जांच की जा रही है ताकि बैक्टीरिया को समाप्त किया जा सके।
फरीदाबाद में गंभीर जल संकट
फरीदाबाद में स्थिति और भी गंभीर है, जहां कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई लाइनें खुले नालों के ऊपर से गुजर रही हैं। बारिश के दौरान नाले ओवरफ्लो होने पर सीवर का पानी पीने के पानी में मिल जाता है। नगर निगम को हर हफ्ते ऐसी 10-12 शिकायतें मिल रही हैं। अब चीफ इंजीनियर ने सभी 46 वार्डों में पानी की सैंपलिंग के आदेश दिए हैं।
गुरुग्राम का बूस्टिंग प्लान
गुरुग्राम नगर निगम ने इंदौर की घटना से सबक लेते हुए 130 से अधिक बूस्टिंग स्टेशनों को अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। सीवेज मिक्सिंग की समस्या को समाप्त करने के लिए करोड़ों के बजट से पुरानी पाइपलाइनें बदली जा रही हैं।
जल संकट का गंभीर संकेत
ये सभी घटनाएँ दिल्ली-एनसीआर में पीने के पानी के खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जल निगम लोगों की चिंताओं का समाधान कर पाएगा और इंदौर जैसी त्रासदी से लोगों को बचा सकेगा।
