दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी पर विवाद गहराया
दिल्ली में फीस बढ़ोतरी का नया विवाद
दिल्ली में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले, प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस में वृद्धि को लेकर एक बार फिर से विवाद उत्पन्न हो गया है। अभिभावकों का आरोप है कि कुछ स्कूल अदालत के आदेशों की अनदेखी करते हुए फीस बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इस मुद्दे पर पेरेंट्स एसोसिएशन ने शिक्षा निदेशालय (DoE) को औपचारिक शिकायत भेजी है। इसके साथ ही, अदालत में फीस से संबंधित नियमों और उनकी वैधता पर सुनवाई भी चल रही है, जिससे अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
फीस वृद्धि पर अभिभावकों की चिंता
अभिभावकों का कहना है कि कई प्राइवेट स्कूल नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए फीस में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव रख रहे हैं। उनका आरोप है कि यह निर्णय स्कूल प्रबंधन की बैठकों में लिया गया, जबकि अदालत ने 1 अप्रैल से फीस न बढ़ाने का निर्देश दिया था। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षा निदेशालय को शिकायत भेजी गई
पेरेंट्स एसोसिएशन ने इस मामले में शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि पहले भी स्कूलों ने लगातार फीस बढ़ाई है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार प्रभावित हुए हैं। एसोसिएशन ने नियमों के तहत पूरे मामले की जांच और स्कूलों के वित्तीय खातों का ऑडिट कराने की मांग की है।
कानूनी स्थिति और नियम
दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस नियमन) एक्ट 2025 के तहत स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं है। इसके लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक है और एक समिति के माध्यम से प्रस्ताव तय किया जाता है। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों के हित सुरक्षित रह सकें।
अदालत में सुनवाई जारी
फीस से जुड़े नियमों पर अदालत में बहस जारी है। अदालत ने कुछ प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा है कि जब तक फीस औपचारिक रूप से तय नहीं होती, तब तक स्कूल पिछले साल के अनुसार ही फीस ले सकते हैं। इस स्थिति में अभिभावकों और स्कूलों दोनों के लिए स्पष्टता का इंतजार बना हुआ है.
