दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर ने स्वेच्छा से पद कम करने का लिया निर्णय
नई दिल्ली में सब-इंस्पेक्टर का अनोखा निर्णय
नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के करावल नगर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनीष ने स्वेच्छा से अपने पद को कम करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को आवेदन देकर बताया कि वह सब-इंस्पेक्टर के रूप में कार्य नहीं करना चाहते। जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद, उन्हें फिर से कांस्टेबल के पद पर बहाल कर दिया गया है। इस निर्णय पर पुलिस विभाग में विभिन्न चर्चाएं हो रही हैं।
आवेदन के पीछे की वजह
मनीष ने वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित रूप में अपनी इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ सहज नहीं हैं और पुराने पद पर लौटना चाहते हैं। आमतौर पर पुलिस विभाग में कर्मचारी प्रमोशन के लिए प्रयासरत रहते हैं, लेकिन इस मामले ने सभी को चौंका दिया। अधिकारियों ने आवेदन प्राप्त होने के बाद मामले की गंभीरता से जांच की।
जांच के बाद मिली स्वीकृति
विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि मनीष के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई, आपराधिक मामला या विजिलेंस जांच लंबित नहीं है। सभी रिकॉर्ड साफ पाए जाने के बाद, डीसीपी स्तर पर उनके अनुरोध को स्वीकृति दी गई। इसके बाद उन्हें दोबारा कांस्टेबल के पद पर तैनात किया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के अनुसार की गई है।
कांस्टेबल से सब-इंस्पेक्टर बने थे मनीष
जानकारी के अनुसार, मनीष ने पुलिस सेवा की शुरुआत कांस्टेबल के रूप में की थी। मेहनत और विभागीय परीक्षा पास करने के बाद उन्हें सब-इंस्पेक्टर का पद मिला। हालांकि, नई जिम्मेदारियों और बढ़ते कार्य के दबाव के कारण वह असहज महसूस करने लगे थे। इसी कारण उन्होंने पुराने पद पर लौटने का निर्णय लिया।
पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं
उनके साथियों का कहना है कि मनीष को पढ़ाई में गहरी रुचि है और वह किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं। सब-इंस्पेक्टर के रूप में ड्यूटी और जिम्मेदारियों के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा था। कांस्टेबल के पद पर अपेक्षाकृत कम प्रशासनिक दबाव होने के कारण उन्हें तैयारी का बेहतर अवसर मिल सकता है।
विभाग में चर्चा का विषय
यह मामला पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई कर्मचारी इसे व्यक्तिगत प्राथमिकता और मानसिक संतुलन से जुड़ा निर्णय मानते हैं। वहीं, कुछ इसे नौकरी के दबाव और कार्यशैली में बदलाव का उदाहरण मानते हैं। हालांकि, मनीष ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। फिर भी, उनका यह कदम पुलिस महकमे में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
