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दिल्ली में प्रदूषण का बढ़ता संकट: स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

दिल्ली में नए साल का दूसरा दिन प्रदूषण के बढ़ते संकट के साथ शुरू हुआ है। धुंध और स्मॉग ने राजधानी की हवा को जहरीला बना दिया है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की गुणवत्ता में गिरावट से अस्थमा और हृदय रोगों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जानें प्रदूषण से बचने के उपाय और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के तरीके।
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दिल्ली में प्रदूषण का बढ़ता संकट: स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति

नई दिल्ली: नए साल का दूसरा दिन दिल्लीवासियों के लिए चिंता का कारण बन गया है। शुक्रवार की सुबह, राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में धुंध और स्मॉग की घनी परत छाई रही। दृश्यता में कमी के साथ, हवा की गुणवत्ता भी अत्यधिक खराब स्तर पर पहुंच गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली का AQI 386 दर्ज किया गया है। ठंड, बादल और धीमी हवाओं ने प्रदूषण को हवा में स्थिर कर दिया है।


दिल्ली की जहरीली हवा के कारण

वर्तमान मौसम की स्थिति प्रदूषण के बढ़ने का मुख्य कारण बन रही है। तापमान में गिरावट और हवा की गति में कमी के कारण 'इनवर्जन' की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका परिणाम यह है कि वाहनों, निर्माण कार्य और धूल से उत्पन्न कण ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, प्रदूषक तत्व जमीन के निकट जमा हो रहे हैं, जिससे स्मॉग का निर्माण हो रहा है और हवा सांस लेने के लिए अनुपयुक्त हो गई है।


प्रदूषण के आंकड़े खतरनाक स्तर पर

आज सुबह के माप के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 का स्तर 233 और PM10 का स्तर 316 दर्ज किया गया है। यह मात्रा सामान्य सीमा से कई गुना अधिक है। न्यूनतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसने प्रदूषण को और बढ़ा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की हवा में लंबे समय तक रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।


स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

डॉक्टरों के अनुसार, 300 से ऊपर का AQI फेफड़ों और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी के मरीजों में सांस लेने में कठिनाई बढ़ सकती है। आंखों में जलन, सिरदर्द और गले में खराश आम समस्याएं बन रही हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है, यहां तक कि स्वस्थ व्यक्तियों में भी।


किसे अधिक सावधानी बरतनी चाहिए

प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। इसके अलावा, सुबह की सैर करने वाले और खुले में काम करने वाले लोग भी जोखिम में हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि जब तक AQI में सुधार नहीं होता, तब तक अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचें और शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।


प्रदूषण से बचने के उपाय

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाहर जाते समय N-95 मास्क का उपयोग करें। सुबह और शाम के समय खुले में व्यायाम से बचें। घर के अंदर खिड़कियां बंद रखें और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें। बच्चों और बुजुर्गों को घर के भीतर ही रखें। पर्याप्त पानी पीना और पौष्टिक आहार भी शरीर को प्रदूषण से लड़ने में मदद करता है।