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दिल्ली में बीजेपी और कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन

दिल्ली में बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक अप्रत्याशित गठबंधन ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। अंबरनाथ नगर परिषद में हुई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये दोनों पार्टियां सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि पार्टी के मीडिया प्रभारी ने इस गठबंधन को जनता के साथ धोखा बताया है। क्या यह गठबंधन देश की राजनीति में एक नया मोड़ लाएगा? जानें पूरी कहानी में।
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दिल्ली में बीजेपी और कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन

दिल्ली में राजनीतिक समीकरणों का नया मोड़


दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस अब एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते नजर आ रहे हैं। ये दोनों पार्टियां, जो आमतौर पर एक-दूसरे को राजनीतिक दुश्मन मानती हैं, अब सत्ता की खातिर एकजुट हो गई हैं। महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में हाल ही में हुई घटनाओं ने इस राजनीतिक वास्तविकता को उजागर किया है। यहाँ, चुनाव के बाद के समीकरणों में बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर बीजेपी के सहयोगी शिंदे सेना को सत्ता से बाहर कर दिया।


आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने अंबरनाथ नगर परिषद की स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए सवाल उठाया कि क्या बीजेपी ने अपने सहयोगी शिंदे सेना को हराने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया है? केजरीवाल ने यह भी पूछा कि यह सब क्या चल रहा है और जनता को किस प्रकार की राजनीति दिखाई जा रही है।


इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी बीजेपी और कांग्रेस पर कड़ा हमला किया। उन्होंने ट्वीट में कहा कि पहले ये दोनों पार्टियां प्रेमी-प्रेमिका की तरह छिपकर मिलती थीं, लेकिन अब उनका संबंध पूरी तरह से सार्वजनिक हो चुका है। ढांडा ने यह भी सवाल किया कि क्या यह देश की जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा नहीं है।


अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस का साथ आना यह दर्शाता है कि मंचों पर एक-दूसरे को कोसने वाली पार्टियां सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे पर देशद्रोह और सांप्रदायिकता के आरोप लगाने वाली ये पार्टियां स्थानीय स्तर पर सत्ता हासिल करने के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लेती हैं।


आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह घटनाक्रम बीजेपी और कांग्रेस की मिलीभगत को उजागर करता है। जनता के सामने विरोध का नाटक और पर्दे के पीछे सत्ता की साझेदारी यही पुरानी राजनीति का असली चेहरा है। सवाल यह है कि अगर ये पार्टियां सच में एक-दूसरे की विरोधी हैं, तो फिर सत्ता के समय यह गठजोड़ क्यों?


यह मामला केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश की राजनीति पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या जनता को लगातार गुमराह किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि ऐसी राजनीति के खिलाफ सच और ईमानदारी की लड़ाई जारी रहेगी.