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दिल्ली में हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ते, डॉक्टरों की चिंता बढ़ी

दिल्ली में बढ़ती गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे डॉक्टरों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हाल ही में आरएमएल अस्पताल में दो गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनमें एक छात्र और एक 50 वर्षीय व्यक्ति शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रोक एक चिकित्सा आपात स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। जानें इसके लक्षण, उपचार और बचाव के उपाय इस लेख में।
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दिल्ली में हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ते, डॉक्टरों की चिंता बढ़ी

दिल्ली में बढ़ती गर्मी और हीट स्ट्रोक


नई दिल्ली: दिल्ली में अत्यधिक गर्मी के कारण 'हीट स्ट्रोक' के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे चिकित्सकों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रोक गर्मी से उत्पन्न होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है, जो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को तेजी से नुकसान पहुंचा सकती है।


यदि समय पर उपचार नहीं किया गया, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। हाल ही में दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में हीट स्ट्रोक के दो गंभीर मामले सामने आए हैं, जहां डॉक्टरों को मरीजों की जान बचाने के लिए आपातकालीन उपायों के तहत उन्हें बर्फ के पानी में रखना पड़ा।


बंगाल के छात्र को ट्रेन में हीट स्ट्रोक

बंगाल के छात्र का मामला: पहला मामला पश्चिम बंगाल के 24 वर्षीय छात्र का है, जो ट्रेन से दिल्ली आया था। डॉक्टरों के अनुसार, उसने गर्मी में ट्रेन के एक भरे हुए जनरल डिब्बे में यात्रा की थी। भीड़, उमस और पानी की कमी के कारण उसका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया। जब उसे अस्पताल लाया गया, तो उसका तापमान लगभग 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया था।


शुरुआत में डॉक्टरों को संदेह था कि उसे ब्रेन स्ट्रोक हुआ है, लेकिन सीटी स्कैन में ऐसा कुछ नहीं पाया गया। जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह हीट स्ट्रोक का गंभीर मामला है। शरीर का तापमान तुरंत कम करने के लिए, डॉक्टरों ने उसे 15 से 20 मिनट के लिए बर्फ के पानी में रखा। वर्तमान में, उस छात्र को आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।


50 वर्षीय व्यक्ति का हीट स्ट्रोक

दूसरा मामला: दूसरा मामला एक 50 वर्षीय व्यक्ति का है, जिसे दिल्ली पुलिस की पीसीआर वैन ने बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया। उस समय उसका तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट था। उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने उसे तुरंत बर्फ के पानी में रखा। इस मरीज की स्थिति भी अभी नाजुक बनी हुई है।


हीट स्ट्रोक क्या है?

हीट स्ट्रोक की जानकारी: विशेषज्ञ बताते हैं कि हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर खुद को ठंडा रखने में असमर्थ हो जाता है। सामान्यतः पसीना आने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, शरीर का तापमान अचानक 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फारेनहाइट) से ऊपर चला जाता है, जो मस्तिष्क, किडनी और हृदय पर गंभीर प्रभाव डालता है। इसके लक्षणों में चक्कर आना, बेहोशी, उल्टी, तेज सांस लेना और भ्रमित होना शामिल हैं।


आम लू और हीट स्ट्रोक में अंतर

लक्षणों में अंतर: डॉक्टरों का कहना है कि लोग अक्सर आम लू और हीट स्ट्रोक को एक समान समझ लेते हैं, जबकि इनमें महत्वपूर्ण अंतर है। आम लू में कमजोरी, सिरदर्द, अत्यधिक पसीना आना या थकान होती है, जो आराम करने और पानी-ओआरएस पीने से ठीक हो जाती है। लेकिन हीट स्ट्रोक एक चिकित्सा आपात स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान बढ़ जाता है, पसीना आना बंद हो सकता है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है। इसमें थोड़ी सी भी देरी अंगों के फेल होने या मृत्यु का कारण बन सकती है।


तुरंत क्या करें?

आपातकालीन उपाय: यदि तेज गर्मी में कोई व्यक्ति बेहोश हो जाए, उसे तेज बुखार हो या दौरे पड़ें, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। जब तक डॉक्टर न मिलें, मरीज को किसी ठंडी या छायादार स्थान पर ले जाएं, उसके कपड़े ढीले करें और पूरे शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां या बर्फ लगाएं। यदि मरीज होश में है, तो ही उसे पानी दें; बेहोशी की स्थिति में मुंह में पानी डालने की गलती न करें।