कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं को 200 क्विंटल प्रसादी का वितरण किया गया
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- शिव भक्ति का पावन केन्द्र बिंदु कुबेरेश्वरधाम, 12 ज्योर्तिलिंगों के मध्यः पंडित प्रदीप मिश्रा
सीहोर, 26 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के समीपस्थ स्थित कुबेरेश्वर धाम में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में जारी सात दिवसीय भव्य रुद्राक्ष महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को महाशिवरात्रि के मौके पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर सुबह से ही यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को करीब 200 क्विंटल से अधिक फलहारी का निशुल्क वितरण किया। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को खीर, फलहारी मिक्चर, खिचड़ी और 20 हजार से अधिक छाछ पाउच वितरण किया।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने कहा कि यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में उनके भोजन के लिए पूरे देश भक्त से सेवादार आए है, मालेगांव से भी सैकड़ों की संख्या में भोजन प्रसादी वितरण करने के लिए आए हैं, उनको में मंच से धन्यवाद देना चाहता हूं। इस मौके पर उनकी सेवा पर लाखों श्रद्धालुओं ने ताली बजाकर उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि सेवा करने वाले को भगवान अवश्य फल देता है, सबसे बड़ी सेवा है, यहां पर आने वाले सेवादार आपकी सेवा में रात-दिन लीन है, यह सबसे बड़ी भक्ति है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा ने शिव महापुराण की कथा सुनाते हुए कहा कि आज महाशिवरात्रि का पावन अवसर है और हम सब भाग्यशाली है जो लाखों की संख्या में शिव भक्ति का पावन केन्द्र बिंदु कुबेरश्वरधाम पर जो कि 12 ज्योर्तिलिंगों के मध्य में है उसमें भगवान शिव की भक्ति में सराबोर है। उन्होंने कहा कि शिव पुराण में वर्णन है कि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर पहली बार शिवलिंग प्रकट हुआ था। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की पूजा की। इसी दिन को शिवरात्रि कहा गया। उन्होंने बुधवार को शिवरात्रि के पावन कथा का वर्णन किया।
पंडित मिश्रा ने कहा कि पूरे देश के श्रद्धालुओं को कुबेरेश्वरधाम पर होने वाले रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर इच्छा रहती है, इस पावन धाम पर होने वाले महोत्सव से, हजारों श्रद्धालुओं के पत्र आते है किसी को पुत्र की प्राप्ति के तो किसी को नौकरी मिलने सहित अन्य बीमारियों के निदान के। सभी देवता देते भैया पल्ला झाड़ कर मेरे भोले बाबा देते भैया छप्पर फाड़कर। भगवान महादेव पर विश्वास और आस्था होना चाहिए, तब ही सत्य के मार्ग पर आप अग्रसर हो सकते है। अपने कर्म के प्रति जिस दिन तुम जागरूक हो जाओगे, उस दिन तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य की प्राप्ति निश्चित है। कर्म का फल जरूर मिलता है। शिवपुराण में भी लिखा है कि स्वयं कर्म करोगे तो दुख घटना शुरू हो जाएगा। कर्म की लिस्ट हम स्वयं तैयार करते है। भगवान शिव की आराधना करने वाला भक्त कभी दुखी नहीं रहता। भगवान भोलेनाथ हर भक्त की सुनते हैं। भोले की भक्ति में शक्ति होती है। भगवान भोलेनाथ कभी भी किसी भी मनुष्य की जिंदगी का पासा पलट सकते हैं। बस भक्तों को भगवान भोलेनाथ पर विश्वास करना चाहिए और उनकी प्रतिदिन आराधना करनी चाहिए। भक्ति हम भी प्रतिदिन करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सभी के संकट दूर करें। स्त्री की गोद और पुरुष की जेब कभी खाली नहीं रहनी चाहिए, अगर खाली रह जाए तो दुनिया जीने नहीं देती है, ताने देती है।
विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य अपनी सेवा दे रहे हैं। मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि तीनों डोम, 15 टेंट हुए फुल हो गए हैं। इसके अलावा गुरुवार को अतिरिक्त टेंट के अलावा अन्य इंतजाम किए जाऐंगे। बुधवार की सुबह महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सुबह रुद्राक्ष शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया गया था, वहीं तीसरे दिन भगवान शिव का विवाह उत्सव मनाया जाएगा। प्रशासन, सेवादार और समिति के अलावा क्षेत्रवासी सेवा में रत है। रुद्राक्ष महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नगर इकाई के द्वारा रेलवे स्टेशन पर भोजन भंडारे की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा श्रद्धालु भी कथा पंडाल में पानी और नाश्ते की व्यवस्था के साथ सेवा करने में जुटे हुए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर