KGMU में नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट भर्ती में नया नियम: 40 साल से ऊपर के डॉक्टरों को नहीं मिलेगा मौका
लखनऊ में केजीएमयू की नई भर्ती प्रक्रिया
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट (जेआर) डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया है कि अब 40 वर्ष से अधिक आयु के एमबीबीएस डॉक्टरों को नॉन पीजी जेआर पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी किया गया है, और नए नियमों के तहत साक्षात्कार 17 जनवरी को आयोजित किए जाएंगे।
केजीएमयू प्रशासन ने यह भी तय किया है कि नॉन पीजी जूनियर रेजिडेंट की भर्ती प्रक्रिया दिल्ली एम्स के मॉडल पर की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 250 नॉन पीजी जेआर के पद स्वीकृत हैं। पहले इन पदों के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा या कार्यकाल निर्धारित नहीं था, जिसके कारण कई डॉक्टर वर्षों तक इसी पद पर बने रहे, जिससे नए एमबीबीएस डॉक्टरों को अवसर नहीं मिल पा रहा था।
18 महीने का कार्यकाल, नए डॉक्टरों को मिलेगा अवसर
नए नियमों के अनुसार, नॉन पीजी जेआर की नियुक्ति अब केवल 18 महीने के लिए की जाएगी। इसके साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया है कि केवल वे डॉक्टर जो एमबीबीएस इंटर्नशिप पूरी करने की तारीख से पांच साल के भीतर हैं, ही इस पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। 40 साल से अधिक आयु के डॉक्टरों को इस भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे युवा डॉक्टरों को अनुभव प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा और अस्पताल में कार्य व्यवस्था भी संतुलित रहेगी।
धर्मगुरुओं के हत्यारोपी से फंडिंग के तार खंगाल रही एजेंसियां
दूसरी ओर, जांच एजेंसियां एक अलग मामले में संदिग्ध फंडिंग के स्रोतों की जांच कर रही हैं। एजेंसियों को संदेह है कि रमीज नामक व्यक्ति के खाते में आए लाखों रुपये हिंदू धर्मगुरुओं की हत्या के आरोपी रजा के गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। रजा को एटीएस ने केरल से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में यह सामने आया था कि वह धर्मांतरण से जुड़े मुस्लिम संगठनों को आर्थिक सहायता प्रदान करता था। रजा और उसके साथियों पर हिंदू धर्मगुरुओं की हत्या के गंभीर आरोप हैं और इस मामले में एटीएस को कई महत्वपूर्ण सबूत भी मिले हैं।
फरारी के दौरान हुई फंडिंग की जांच
एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि रमीज के खाते में फरारी के दौरान जो रकम जमा हुई, क्या वह रजा के नेटवर्क के माध्यम से भेजी गई थी। रजा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का निवासी बताया जा रहा है। जांच अधिकारी पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटे हैं ताकि फंडिंग के पूरे रास्ते का खुलासा किया जा सके।
काजी जाहिद की तलाश में तीन राज्यों में छापेमारी
इसी मामले से जुड़े एक अन्य पहलू में चौक पुलिस और अन्य एजेंसियां उस काजी जाहिद की तलाश कर रही हैं, जिसने आगरा की एक पीड़ित महिला डॉक्टर का पीलीभीत के न्योरिया क्षेत्र में धर्मांतरण कराकर निकाह कराया था। माना जा रहा है कि जाहिद की गिरफ्तारी से पूरे गिरोह के नेटवर्क के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसकी तलाश में टीमें दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार दबिश दे रही हैं।
